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कामकाजी पत्नी की तलाक मामला ट्रांसफर करने की मांग खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- ऑनलाइन सुनवाई में हो सकती हैं शामिल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पत्नी की तलाक मामला मेहकर से नांदेड़ ट्रांसफर करने की मांग खारिज कर दी और कहा कि वह ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हो सकती है तथा यात्रा खर्च भी प्राप्त कर सकती है।

Shivam Y.
कामकाजी पत्नी की तलाक मामला ट्रांसफर करने की मांग खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- ऑनलाइन सुनवाई में हो सकती हैं शामिल

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने एक पत्नी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पति द्वारा दायर तलाक मामले को मेहकर से नांदेड़ स्थानांतरित करने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि पत्नी एक सरकारी कर्मचारी है, उसकी स्वतंत्र आय है और वह आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी कार्यवाही में शामिल हो सकती है।

मामले की पृष्ठभूमि

आवेदिका ऐश्वर्या मंगेश गवई ने हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर मेहकर की अदालत में लंबित वैवाहिक वाद को नांदेड़ के पारिवारिक न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि मेहकर और नांदेड़ के बीच लगभग 200 किलोमीटर की दूरी है, जिससे उन्हें अदालत में उपस्थित होने में कठिनाई होती है।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पति और पत्नी दोनों भारतीय डाक विभाग में कार्यरत हैं। पत्नी नांदेड़ में पदस्थ है, जबकि पति मुंबई में कार्यरत है और उसका मूल निवास मेहकर तालुका में है।

पति ने ट्रांसफर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पत्नी ने सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया है। साथ ही उसने यह भी कहा कि यदि पत्नी को मेहकर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़े, तो वह उसके यात्रा खर्च का भुगतान करने को तैयार है।

न्यायमूर्ति अभय जे. मंत्री ने कहा कि सामान्यतः अदालतें पत्नी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों में राहत देती हैं, लेकिन वर्तमान मामले की परिस्थितियां अलग हैं।

अदालत ने कहा कि आवेदिका एक कामकाजी महिला है और उसके पास आय का स्वतंत्र स्रोत है। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि पति द्वारा तलाक याचिका दायर किए जाने के बाद ही पत्नी ने नांदेड़ में घरेलू हिंसा अधिनियम तथा अन्य आपराधिक कार्यवाही शुरू की।

पीठ ने यह भी माना कि दोनों पक्ष पहले मेहकर न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में स्थित स्थान पर साथ रह चुके थे। इसलिए मेहकर की अदालत को मामले की सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है।

अदालत ने कहा, “मेहकर की अदालत इस मामले की सुनवाई और निर्णय करने के लिए सक्षम है।” साथ ही यह भी उल्लेख किया कि दंपति की कोई संतान नहीं है।

न्यायालय ने आगे कहा कि यह एक दीवानी प्रकृति की कार्यवाही है और आवेदिका आवश्यक आवेदन देकर ऑनलाइन माध्यम से भी सुनवाई में भाग ले सकती है। इसलिए प्रत्येक तारीख पर उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है।

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने ट्रांसफर याचिका में कोई दम नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि आवेदिका वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांग सकती है और संबंधित अदालत ऐसे आवेदन पर सकारात्मक विचार कर सकती है। इसके अलावा, यदि वह मेहकर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होती है, तो पति को उसके बस या ट्रेन टिकट का खर्च तथा 500 रुपये अन्य व्ययों के लिए भुगतान करना होगा।

इसी के साथ आवेदन का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details

Case Title: AMG v. MJG

Case Number: Miscellaneous Civil Application No. 149 of 2025

Judge: Justice Abhay J. Mantri

Decision Date: June 15, 2026

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