सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को मुंबई के चेंबूर स्थित भक्ति पार्क इलाके में विकसित किए गए गार्डन के लिए अतिरिक्त सुविधा संबंधी हस्तांतरणीय विकास अधिकार (TDR) देने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि भूमि मालिक ने पहले ही निगम के साथ किए गए समझौतों और प्रतिज्ञापत्रों (undertakings) में अतिरिक्त amenity TDR (सुविधा संबंधी विकास अधिकार) का दावा नहीं करने पर सहमति दी थी।
मामला क्या था
यह विवाद चेंबूर के भक्ति पार्क स्थित उस जमीन से जुड़ा था जिसे महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act) के तहत “गार्डन” के लिए आरक्षित किया गया था। बाद में भूमि मालिक ने यह जमीन BMC को सौंप दी और बदले में उसे जमीन के बदले TDR प्रदान किया गया।
इसके साथ ही भूमि मालिक ने गार्डन विकसित करने और 20 वर्षों तक उसका रखरखाव करने की जिम्मेदारी भी ली थी। इसके लिए Letter of Intent, प्रतिज्ञापत्र (undertaking) और रखरखाव समझौते (maintenance agreement) पर हस्ताक्षर किए गए थे। जिनमें साफ तौर पर लिखा गया था कि भूमि मालिक अतिरिक्त amenity TDR की मांग नहीं करेगा।
साल 2016 में लोकायुक्त कार्यवाही के बाद BMC ने गार्डन का कब्जा वापस ले लिया। इसके लगभग तीन साल बाद, 2019 में भूमि मालिक ने अतिरिक्त amenity TDR की मांग की, जिसे निगम ने खारिज कर दिया।
इसके खिलाफ दायर याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भूमि मालिक के पक्ष में फैसला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने MRTP Act की धारा 126(1)(b) से जुड़े पहले के कई फैसलों, जिनमें गोदरेज एंड बॉयस और कुकरेजा कंस्ट्रक्शन मामले शामिल हैं, पर विस्तार से विचार किया।
हालांकि अदालत ने कहा कि वर्तमान मामला अलग परिस्थितियों वाला है क्योंकि भूमि मालिक ने स्वयं समझौतों में अतिरिक्त amenity TDR नहीं मांगने की शर्त स्वीकार की थी।
कोर्ट ने Letter of Intent, undertaking और maintenance agreement का उल्लेख करते हुए कहा कि दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से यह शर्त मौजूद थी कि गार्डन के विकास और रखरखाव के बदले अतिरिक्त amenity TDR का दावा नहीं किया जाएगा।
पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट की उस व्याख्या से भी असहमति जताई जिसमें कहा गया था कि 2016 में BMC द्वारा गार्डन का कब्जा वापस लेने के बाद यह शर्त स्वतः समाप्त हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज ऐसी व्याख्या का समर्थन नहीं करते।
अदालत ने यह भी नोट किया कि अतिरिक्त amenity TDR की मांग लगभग 17 साल बाद उठाई गई। हालांकि पहले के कुछ मामलों में देरी को अकेला आधार मानकर दावा खारिज नहीं किया गया था, लेकिन इस मामले में पक्षों के बीच हुए समझौते महत्वपूर्ण थे।
सुप्रीम कोर्ट ने BMC की अपील स्वीकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और अतिरिक्त amenity TDR देने से इनकार करने वाले निगम के निर्णय को बरकरार रखा।
Case Details
Case Title: Brihanmumbai Municipal Corporation & Ors. v. Vijay Nagar Apartments & Ors.
Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 11541 of 2024
Judges: Justice J.K. Maheshwari & Justice Atul S. Chandurkar
Decision Date: May 20th 2026










