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कॉरपोरेट गारंटी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: SBI कंसोर्टियम की अपील खारिज, NCLAT का फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने SBI कंसोर्टियम की अपील खारिज कर कॉरपोरेट गारंटी को वैध माना, NCLAT के फैसले को बरकरार रखते हुए IBC के तहत फाइनेंशियल डेट की पुष्टि की। - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और अन्य बनाम दोहा बैंक क्यू.पी.एस.सी. और अन्य।

Rajan Prajapati
कॉरपोरेट गारंटी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: SBI कंसोर्टियम की अपील खारिज, NCLAT का फैसला बरकरार

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कॉरपोरेट गारंटी की वैधता को लेकर अहम फैसला सुनाया। अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत कंसोर्टियम बैंकों की अपील खारिज कर दी और NCLAT के आदेश को बरकरार रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला एक विदेशी मुद्रा ऋण से जुड़ा है, जो दोहा बैंक ने रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड (कॉरपोरेट डेब्टर) को दिया था। बाद में इस ऋण के लिए कॉरपोरेट गारंटी दी गई।

SBI कंसोर्टियम-जिसमें कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल थे-ने इस गारंटी की वैधता को चुनौती दी। उनका तर्क था कि:

  • गारंटी के निष्पादन का समय और परिस्थितियाँ संदिग्ध थीं
  • वित्तीय विवरणों में उचित खुलासा नहीं हुआ
  • स्टाम्पिंग और सत्यापन में कमी थी

इन आधारों पर उन्होंने गारंटी को “फाइनेंशियल डेट” मानने का विरोध किया।

न्यायमूर्ति आलोक अराधे की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन आपत्तियों पर विस्तार से विचार किया।

अदालत ने कहा कि सिर्फ तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमियों के आधार पर कॉरपोरेट गारंटी को खारिज नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसका मूल उद्देश्य और वैधता प्रभावित न हो।

पीठ ने स्पष्ट किया:

“कोर्ट को यह देखना होगा कि क्या गारंटी वास्तव में एक वित्तीय देनदारी को दर्शाती है, न कि केवल दस्तावेज़ी कमियों पर निर्णय लेना।”

अदालत ने यह भी माना कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत “फाइनेंशियल क्रेडिटर” की पहचान व्यापक रूप से की जानी चाहिए।

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“केवल तकनीकी आधार पर किसी लेन-देन को वित्तीय ऋण के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता,” पीठ ने कहा।

मुख्य सवाल यह था कि क्या कॉरपोरेट गारंटी, जिन पर कुछ प्रक्रियात्मक आपत्तियाँ हैं, IBC के तहत “फाइनेंशियल डेट” मानी जाएंगी या नहीं।

अदालत ने माना कि:

  • गारंटी का उद्देश्य ऋण को सुरक्षित करना था
  • यह वित्तीय दायित्व का हिस्सा है
  • इसलिए इसे वैध माना जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने SBI कंसोर्टियम की अपील खारिज कर दी। साथ ही, NCLAT और NCLT के आदेशों को बरकरार रखा, जिनमें कॉरपोरेट गारंटी को वैध और लागू माना गया था।

Case Details

Case Title: State Bank of India & Ors. v. Doha Bank Q.P.S.C. & Anr.

Case Number: Civil Appeal No. 8527 of 2022

Judge: Justice Alok Aradhe and Justice Pamidighantam Sri Narasimha

Decision Date: April 28, 2026

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