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सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को बरकरार रखा, लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में पत्नी के भरण-पोषण की राशि ₹10,000 प्रति माह कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने पति को तलाक बरकरार रखते हुए पत्नी को हर महीने ₹10,000 भरण-पोषण देने का आदेश दिया, निचली अदालतों के फैसले को सही माना। - ममता देवी बनाम संजय कुमार

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को बरकरार रखा, लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में पत्नी के भरण-पोषण की राशि ₹10,000 प्रति माह कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए पति को दिया गया तलाक बरकरार रखा, लेकिन पत्नी के आर्थिक अधिकार को ध्यान में रखते हुए मासिक भरण-पोषण बढ़ा दिया। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों के निष्कर्ष तथ्यों पर आधारित हैं और उनमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

ममता देवी और संजय कुमार की शादी 24 फरवरी 2002 को झारखंड के बोकारो में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। उनके दो बच्चे हैं।
समय के साथ दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे। पत्नी ने दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए, जबकि पति ने आरोप लगाया कि पत्नी का व्यवहार आक्रामक था और वह लगातार झगड़े करती थी।

2018 में पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक की याचिका दायर की।
फैमिली कोर्ट, बोकारो ने 23 नवंबर 2022 को पति के पक्ष में तलाक का आदेश दिया, जिसे बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।

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सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकॉर्ड का विस्तार से अध्ययन किया।

कोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि पत्नी का व्यवहार “क्रूरता” (cruelty) और “परित्याग” (desertion) के दायरे में आता है।

“अदालतों द्वारा दर्ज निष्कर्ष साक्ष्यों के मूल्यांकन पर आधारित हैं और इनमें कोई ऐसी त्रुटि नहीं है, जिससे हस्तक्षेप किया जाए,” बेंच ने कहा।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि:

  • दोनों पक्ष 2018 से अलग रह रहे हैं
  • वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं
  • बच्चों के साथ भी संबंध तनावपूर्ण हैं

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस निष्कर्ष से सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि पत्नी का व्यवहार पति के प्रति क्रूरता दर्शाता है।
कोर्ट ने बेटे की गवाही और अन्य दस्तावेजों को भी महत्वपूर्ण माना, जिनसे पारिवारिक विवाद की गंभीरता सामने आई।

हालांकि तलाक को बरकरार रखते हुए कोर्ट ने आर्थिक पहलू पर अलग दृष्टिकोण अपनाया।

फैमिली कोर्ट ने पहले पत्नी को ₹6 लाख की एकमुश्त राशि देने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए संशोधित किया।

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“पूर्ण न्याय के हित में यह उचित होगा कि पत्नी को निरंतर आर्थिक सहायता दी जाए,” कोर्ट ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने:

  • तलाक के आदेश को बरकरार रखा
  • पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को अब ₹10,000 प्रति माह भरण-पोषण के रूप में दे

इस प्रकार, अपील का निपटारा कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Mamta Devi vs Sanjay Kumar

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 20325 of 2024

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: April 10, 2026

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