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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा: डेयरी सहकारी समितियों के चुनाव नियम वैध, नई शर्तें लागू रहेंगी

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान डेयरी सहकारी समितियों के चुनाव उपनियमों को वैध ठहराते हुए हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, पात्रता शर्तों को सही माना। - राम चंद्र चौधरी एवं अन्य। रूप नगर दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड एवं अन्य।

Vivek G.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा: डेयरी सहकारी समितियों के चुनाव नियम वैध, नई शर्तें लागू रहेंगी

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े एक अहम विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ किया कि समितियों द्वारा बनाए गए चुनाव संबंधी उपनियम (bye-laws) कानून के खिलाफ नहीं हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उन उपनियमों से जुड़ा था, जिनमें जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के चुनाव लड़ने के लिए कुछ अतिरिक्त शर्तें तय की गई थीं।

इन शर्तों में शामिल था:

  • न्यूनतम दिनों तक दूध की सप्लाई करना
  • ऑडिट कैटेगरी के आधार पर पात्रता
  • लगातार संचालन (non-functional न होना)

कुछ प्राथमिक दुग्ध समितियों ने इन नियमों को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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हाईकोर्ट ने 2015 में इन उपनियमों को कानून के खिलाफ (ultra vires) बताते हुए रद्द कर दिया था, जिसे 2022 में डिवीजन बेंच ने भी बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट में अपील उन जिला सहकारी संघों के पदाधिकारियों ने दायर की, जो पहले हाईकोर्ट में पक्षकार नहीं थे लेकिन फैसले से प्रभावित थे।

कोर्ट ने पहले यह माना कि ऐसे प्रभावित व्यक्ति अपील कर सकते हैं, भले ही वे मूल केस में पक्षकार न रहे हों।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण बातें कही:

"उच्च न्यायालय को मामले की खूबियों पर विचार करने से पहले यह जांच करनी चाहिए थी कि रिट याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं।"

अदालत ने कहा कि:

  • सहकारी समितियां सामान्यतः “राज्य” (State) की श्रेणी में नहीं आतीं
  • उनके आंतरिक मामलों (जैसे चुनाव) में सीधे रिट याचिका दाखिल करना सही नहीं होता
  • ऐसे मामलों के लिए कानून में पहले से वैकल्पिक उपाय (alternative remedy) मौजूद हैं

सबसे बड़ा सवाल यह था कि:
क्या सहकारी समितियां अपने चुनाव के लिए अतिरिक्त पात्रता शर्तें तय कर सकती हैं?

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सुप्रीम कोर्ट ने माना कि:

  • चुनाव लड़ना एक “कानूनी अधिकार” (statutory right) है, न कि मौलिक अधिकार
  • इसलिए इसे नियमों के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है
  • उपनियम केवल “पात्रता” तय करते हैं, “अयोग्यता” (disqualification) नहीं

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने:

  • राजस्थान हाईकोर्ट के 2015 और 2022 के दोनों फैसलों को रद्द कर दिया
  • संबंधित उपनियमों को वैध माना
  • यह स्पष्ट किया कि सहकारी समितियां अपने कामकाज और चुनाव के लिए उचित शर्तें तय कर सकती हैं

Case Details

Case Title: Ram Chandra Choudhary & Ors. v. Roop Nagar Dugdh Utpadak Sahakari Samiti Ltd. & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 4352 of 2026 (arising out of SLP (C) No. 38579 of 2025)

Judge: Justice R. Mahadevan and B.V.Nagarathna

Decision Date: APRIL 10, 2026.

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