2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। सोमवार को मामले का उल्लेख (mentioning) किया गया, जहां अदालत ने ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग पर विचार करने की बात कही।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़ा है, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के दौरान भड़की थी। पुलिस के अनुसार, इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।
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उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, दंगा और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह हिंसा एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जबकि पांच अन्य आरोपियों को राहत दी गई थी।
अदालत ने कहा था कि खालिद और इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से “गुणात्मक रूप से अलग” है। रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया (prima facie) उनके खिलाफ मामला बनता है।
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पीठ ने कहा था,
“अभियोजन की सामग्री से प्रथम दृष्टया आरोप सामने आते हैं… इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है।”
सोमवार (13 अप्रैल) को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उमर खालिद की ओर से मामले का उल्लेख करते हुए आग्रह किया कि पुनर्विचार याचिका की सुनवाई ओपन कोर्ट में की जाए।
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सिब्बल ने कहा,
“मामला बुधवार को सूचीबद्ध है… मेरा अनुरोध है कि इसे ओपन कोर्ट में सुना जाए।”
इस पर न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने संक्षेप में कहा, “हम कागजात देखेंगे, और आवश्यकता हुई तो मामले को सूचीबद्ध करेंगे,” जिससे स्पष्ट हुआ कि अदालत पहले रिकॉर्ड का अध्ययन करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ओपन कोर्ट में सुनवाई को लेकर कोई औपचारिक आदेश पारित नहीं किया है। पुनर्विचार याचिका 15 अप्रैल को सूचीबद्ध है और अदालत रिकॉर्ड देखने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
Case Title: Umar Khalid v. State of NCT of Delhi









