नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते हुए कर्नाटक के एक कथित हत्या मामले में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल “आखिरी बार साथ देखे जाने” (last seen together) के आधार पर किसी को दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कर्नाटक राज्य से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट और बाद में हाई कोर्ट ने आरोपियों को दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि मृतक को आखिरी बार आरोपियों के साथ देखा गया था और बाद में उसका शव बरामद हुआ।
हालांकि, बचाव पक्ष ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य का अभाव है। उन्होंने विशेष रूप से “डिस्कवरी एविडेंस” यानी आरोपियों के कथित खुलासे के आधार पर मिले सबूतों की विश्वसनीयता को चुनौती दी।
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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पूरे मामले की गहराई से जांच की और पाया कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए कई अहम सबूत भरोसेमंद नहीं हैं।
पीठ ने कहा,
“डिस्कवरी एविडेंस को आरोपियों के खिलाफ उपयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता।”
अदालत ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि केवल “लास्ट सीन टुगेदर” जैसी परिस्थिति के आधार पर हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोष सिद्ध करना उचित नहीं है।
पीठ ने अपने फैसले में कहा,
“अभियोजन का मामला ‘हो सकता है सही’ (may be true) लेकिन यह ‘निश्चित रूप से सही’ (must be true) नहीं है। इन दोनों के बीच लंबा अंतर है।”
इस मामले में मुख्य सवाल यह था कि क्या केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य—विशेषकर “आखिरी बार साथ देखे जाने”—के आधार पर दोषसिद्धि संभव है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए “बियॉन्ड रीजनेबल डाउट” (संदेह से परे) प्रमाण जरूरी है। यदि साक्ष्य इस स्तर तक नहीं पहुंचते, तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
पीठ ने कहा,
“कुल मिलाकर, हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अभियोजन अपने आरोप सिद्ध नहीं कर पाया है।”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलों को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि वे किसी अन्य मामले में आवश्यक नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
Case Details
Case Title: Anand Jakkappa Pujari @ Gaddadar v. State of Karnataka & connected matter
Case Number: Criminal Appeal No. 1864 of 2024 & Criminal Appeal No. 2180 of 2026
Judge: Justice J.B. Pardiwala and Justice K. V. Viswanathan
Decision Date: 27th April, 2026











