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कमजोर सबूत, प्रत्यक्ष संबंध का अभाव और लंबी हिरासत यूएपीए के तहत जमानत को उचित ठहरा सकती है: जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने UAPA केस में कमजोर सबूत और लंबी हिरासत को देखते हुए आरोपी को जमानत दी, कहा केवल सह-आरोपियों के बयान पर्याप्त नहीं। - अमीन अल्लाई बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी

Shivam Y.
कमजोर सबूत, प्रत्यक्ष संबंध का अभाव और लंबी हिरासत यूएपीए के तहत जमानत को उचित ठहरा सकती है: जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि केवल सह-आरोपियों के बयान और कमजोर सबूतों के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपी अमीन अल्लाई को जमानत दे दी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एनआईए द्वारा दर्ज एक केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर आपराधिक साजिश (IPC 120-B), NDPS एक्ट और UAPA के तहत आरोप लगाए गए थे।

अमीन अल्लाई को इस केस में आरोपी नंबर 13 (A-13) बनाया गया था। वह 1 मार्च 2021 से जेल में बंद था और ट्रायल कोर्ट ने 19 अप्रैल 2025 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

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आरोप था कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था और उससे मिले पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता था।

आरोपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि:

  • उसके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई
  • पूरा केस सिर्फ सह-आरोपियों के बयान और फोन कॉल्स पर आधारित है
  • उसके खिलाफ कोई ठोस और स्वतंत्र सबूत नहीं है

उन्होंने यह भी कहा कि इतने लंबे समय तक हिरासत में रखना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

कोर्ट ने रिकॉर्ड और चार्जशीट का अध्ययन करने के बाद कहा कि:

“मामले में आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या ठोस सबूत नहीं है, और पूरा आरोप मुख्यतः एक ‘एप्रूवर’ के बयान पर आधारित है।”

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:

“सह-आरोपियों के कबूलनामे और बयान कमजोर साक्ष्य होते हैं और इन्हें अकेले आधार बनाकर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।”

कोर्ट ने पाया कि:

  • आरोपी से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ
  • उसकी भूमिका केवल “परिधीय” (peripheral) दिखाई देती है
  • उसके खिलाफ कोई सीधा लेन-देन या सक्रिय भागीदारी का प्रमाण नहीं है

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि:

  • UAPA के तहत जमानत सख्त जरूर है, लेकिन पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं
  • लंबे समय तक हिरासत और कमजोर सबूत होने पर जमानत दी जा सकती है

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कोर्ट ने यह भी कहा कि:

“केवल संदेह के आधार पर किसी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है।”

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और अमीन अल्लाई को जमानत दे दी।

कोर्ट ने जमानत के लिए कुछ शर्तें तय कीं:

  • ₹1 लाख का निजी मुचलका और दो जमानतदार
  • हर सुनवाई में अदालत में उपस्थित होना
  • बिना अनुमति जम्मू-कश्मीर से बाहर न जाना
  • समान अपराध में शामिल न होना

इस प्रकार, कोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ prima facie (पहली नजर में) आरोप साबित नहीं होते और उसे जमानत का हकदार माना।

Case Details:

Case Title: Amin Allaie v. National Investigation Agency

Case Number: Crl A(D) No. 26/2025

Judge: Justice Sanjeev Kumar & Justice Sanjay Parihar

Decision Date: 02 April 2026

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