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न्यायाधीशों पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट्स को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बंगाल DGP से मांगी SOP

कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट्स पर चिंता जताते हुए बंगाल DGP से कार्रवाई संबंधी SOP पर रिपोर्ट मांगी है। - महाराज स्वामी प्रदीप्तानंद @ कार्तिक महाराज बनाम पश्चिम बंगाल राज्य

Shivam Y.
न्यायाधीशों पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट्स को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बंगाल DGP से मांगी SOP

कलकत्ता हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों को निशाना बनाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स पर चिंता जताते हुए पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) से पूछा है कि क्या ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) मौजूद है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह आदेश स्वामी प्रदीप्तानंद उर्फ कार्तिक महाराज की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज रेप मामले को रद्द करने की मांग की है। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर उसके साथ कई बार यौन शोषण किया गया।

याचिकाकर्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है और दावा किया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने कुछ यूट्यूब वीडियो का उल्लेख किया, जिनमें अदालत और न्यायाधीशों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।

अदालत ने कहा,

“यहां तक कि जिस दिन यह बेंच बैठी भी नहीं थी, उस दिन भी ऐसे आरोप लगाए गए मानो बंद कमरे में कोई प्रतिकूल कदम उठाया जा रहा हो।”

कोर्ट ने आगे कहा कि वीडियो में हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ “मानहानिकारक और अवमाननापूर्ण टिप्पणियां” की गईं और कुछ वीडियो “काफी परेशान करने वाले” थे।

हाईकोर्ट ने राज्य के DGP को चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह बताना होगा कि “स्पष्ट रूप से झूठे, आपत्तिजनक और अवमाननापूर्ण” सोशल मीडिया पोस्ट्स के खिलाफ कार्रवाई तथा उन्हें हटाने के लिए कोई SOP लागू है या नहीं।

मामले की अगली सुनवाई 22 जून 2026 को होगी।

Case Title: Maharaj Swami Pradiptananda @ Kartik Maharaj v. State of West Bengal

Case Number: CRR 2832 of 2025

Judge: Justice Jay Sengupta

Decision Date: May 21, 2026

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