मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

निर्धारित समय में रकम जमा नहीं करने पर स्पेसिफिक परफॉर्मेंस डिक्री निष्पादन योग्य नहीं रहती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेसिफिक परफॉर्मेंस डिक्री में तय समय के भीतर शेष राशि जमा न करने पर डिक्री निष्पादन योग्य नहीं रहती। - हब्बन शाह बनाम शेरुद्दीन

Shivam Y.
निर्धारित समय में रकम जमा नहीं करने पर स्पेसिफिक परफॉर्मेंस डिक्री निष्पादन योग्य नहीं रहती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पेसिफिक परफॉर्मेंस से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि यदि डिक्री में तय समय के भीतर खरीदार शेष बिक्री राशि जमा नहीं करता, तो ऐसी डिक्री बाद में निष्पादित नहीं कराई जा सकती। अदालत ने साफ किया कि केवल बाद में रकम जमा कर देने से देरी अपने-आप माफ नहीं मानी जाएगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद हरियाणा के मेवात जिले की कृषि भूमि से जुड़ा था। वर्ष 2005 में हब्बन शाह ने अपनी जमीन शेरुद्दीन को बेचने के लिए समझौता किया था। समझौते के अनुसार कुछ राशि अग्रिम दी गई थी और बाकी रकम बिक्री विलेख के समय अदा की जानी थी।

जब तय समय तक बिक्री विलेख निष्पादित नहीं हुआ, तब शेरुद्दीन ने विशिष्ट राहत अधिनियम स्पेसिफिक परफॉर्मेंस का मुकदमा दायर किया। ट्रायल कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2012 को खरीदार के पक्ष में डिक्री पारित करते हुए निर्देश दिया कि तीन महीने के भीतर शेष राशि प्राप्त होने पर विक्रेता बिक्री विलेख निष्पादित करे।

हालांकि खरीदार ने निर्धारित अवधि में रकम जमा नहीं की। बाद में उसने डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन दायर किया, जिसका विक्रेता ने विरोध किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिक्री में दोनों पक्षों पर पारस्परिक दायित्व थे। अदालत ने माना कि भले आदेश में सीधे शब्दों में खरीदार को तीन महीने के भीतर रकम जमा करने का निर्देश न दिया गया हो, लेकिन डिक्री की प्रकृति से यह जिम्मेदारी स्पष्ट थी।

पीठ ने कहा कि विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 की धारा 28 अदालत को यह अधिकार देती है कि यदि डिक्री की शर्तों का पालन नहीं किया जाता, तो अनुबंध को समाप्त माना जा सकता है।

पीठ ने कहा,

“देरी होने पर समय स्वतः बढ़ा हुआ नहीं माना जा सकता और न ही इसे स्वतः माफ माना जा सकता है।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि खरीदार ने निर्धारित समय के भीतर समय बढ़ाने के लिए कोई आवेदन दाखिल नहीं किया। बाद में अदालत की अनुमति से राशि जमा करना समय विस्तार के बराबर नहीं माना जा सकता।

पीठ ने कहा कि स्पेसिफिक परफॉर्मेंस एक न्यायसंगत और विवेकाधीन राहत है, इसलिए राहत पाने वाले पक्ष को भी अपनी जिम्मेदारियों का समय पर पालन करना होगा।

अदालत ने टिप्पणी की,

“जो व्यक्ति न्यायसंगत राहत चाहता है, उसे स्वयं भी न्यायसंगत आचरण करना होगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और निष्पादन अदालत के आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि तय तीन महीने की अवधि में शेष बिक्री राशि जमा न करने के कारण स्पेसिफिक परफॉर्मेंस की डिक्री निष्पादन योग्य नहीं रही।

कोर्ट ने विक्रेता को निर्देश दिया कि वह खरीदार को 80,000 रुपये की अग्रिम राशि 8 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित लौटाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि विक्रेता राशि लौटाने में असमर्थ हो, तो वह आधा एकड़ भूमि बेचकर भुगतान कर सकता है।

Case Details

Case Title: Habban Shah v. Sheruddin

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 14479 of 2025

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice S. V. N. Bhatti

Decision Date: May 6, 2026

Mobile App

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Install App
CourtBook Mobile App

More Stories