सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का शिकार हुए एक युवक को बड़ा राहत देते हुए उसका मुआवजा ₹12.17 लाख से बढ़ाकर ₹56.83 लाख कर दिया। अदालत ने कहा कि गंभीर दिव्यांगता वाले व्यक्ति को जीवनभर देखभाल और सहायक की जरूरत होती है, इसलिए मुआवजे का आकलन वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला राजस्थान के एक सड़क हादसे से जुड़ा है। रिकॉर्ड के अनुसार, 8 नवंबर 2016 को 14 वर्षीय हंसराज अपने दोस्त के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा था। वह पीछे बैठा था। आरोप है कि चालक ने लापरवाही से बाइक चलाते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे टक्कर मार दी, जिससे हंसराज गंभीर रूप से घायल हो गया।
दुर्घटना में उसके सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं। उसे करीब 203 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा और बाद में वह 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो गया। इसके बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवजे की मांग की गई थी।
ट्रिब्यूनल ने पहले ₹7.76 लाख का मुआवजा दिया था। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे बढ़ाकर ₹12.17 लाख कर दिया। लेकिन पीड़ित ने इसे अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा तय की गई काल्पनिक आय (notional income) बहुत कम थी। अदालत ने माना कि 2016 में राजस्थान में कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय तय की जानी चाहिए थी।
पीठ ने कहा,
“अपीलकर्ता को स्थायी दिव्यांगता हुई है और उसे पूरे जीवन दो सहायकों की आवश्यकता रहेगी।”
अदालत ने यह भी माना कि केवल चिकित्सा खर्च ही नहीं, बल्कि मानसिक पीड़ा, जीवन की सुविधाओं का नुकसान और भविष्य की जरूरतों को भी मुआवजे में शामिल किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सहायक (attendant) खर्च को भी काफी बढ़ाया। अदालत ने कहा कि इतनी गंभीर स्थिति में चौबीसों घंटे मदद की जरूरत होगी और इस खर्च का वास्तविक आकलन जरूरी है।
अदालत ने कुल मुआवजा बढ़ाकर ₹56,83,663 कर दिया। इसमें आय का नुकसान, दो सहायकों का खर्च, भविष्य के इलाज का खर्च, मानसिक पीड़ा, विवाह संभावनाओं का नुकसान तथा विशेष आहार और परिवहन खर्च शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सहायक खर्च के तहत तय राशि का 25 प्रतिशत तुरंत जारी किया जाए, जबकि शेष 75 प्रतिशत फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाए ताकि भविष्य में देखभाल का खर्च पूरा हो सके।
अदालत ने मुआवजे पर दावा याचिका दायर होने की तारीख से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया।
Case Details
Case Title: Hansraj v. Mukesh Nath and Others
Case Number: Civil Appeal arising out of SLP(C) No. 13122 of 2024
Judges: Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar
Decision Date: May 6, 2026










