इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि गलत तथ्य रखने पर कड़ी नाराजगी भी जताई। अदालत ने अंततः आरोपी मंजीत कुमार को जमानत दे दी, लेकिन उससे पहले पुलिस अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला केस क्राइम नंबर 226/2025 से जुड़ा है, जिसमें आरोपी मंजीत कुमार पर एक महिला की हत्या का आरोप लगाया गया। एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने कथित रूप से विवाह के लिए दबाव बनाया और मना करने पर अन्य लोगों के साथ मिलकर हत्या की।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों के बीच प्रेम संबंध था और घटना के दिन दोनों ने जहर का सेवन किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चोटों के बजाय केवल सूजन पाई गई, जिसे गिरने से भी संभव बताया गया। साथ ही, एफआईआर दर्ज करने में 17 दिन की देरी पर भी सवाल उठाए गए।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जमानत याचिका से संबंधित “पैरावाइज कमेंट्स” समय पर तैयार नहीं किए गए थे। इस देरी को लेकर पहले पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग और विरोधाभासी जानकारी दी।
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रस्तुत हलफनामों में गलत तथ्य रखे गए थे।
अदालत ने टिप्पणी की,
“जो अधिकारी जिले की जिम्मेदारी संभाल रहा है, उसे अपने अधीनस्थों द्वारा दी गई जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करनी चाहिए। गलत हलफनामा देना अवमानना की कार्रवाई को आमंत्रित कर सकता है।”
सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस , बस्ती, डॉ. यश वीर सिंह ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि उनके पूर्व हलफनामे में गलत तथ्य शामिल हो गए थे, जो उन्हें अधीनस्थ से प्राप्त जानकारी पर आधारित थे।
अदालत ने माना कि एसपी द्वारा प्रस्तुत जानकारी गलत थी और यह अपने अधीनस्थ अधिकारी को बचाने का प्रयास प्रतीत होता है। हालांकि, माफी को देखते हुए अदालत ने सख्ती कम करते हुए केवल चेतावनी दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि एसपी पूरे दिन अदालत में उपस्थित रहें ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
मामले के तथ्यों, साक्ष्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि:
“घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है, केवल अंतिम बार साथ देखे जाने की बात है। हथियार की बरामदगी भी नहीं हुई है और जांच पूरी हो चुकी है।”
इन परिस्थितियों में, अदालत ने बिना मामले के गुण-दोष पर अंतिम टिप्पणी किए आरोपी को जमानत देने का फैसला किया।
अदालत ने शर्तें भी तय कीं, जिनमें गवाहों को प्रभावित न करना, जांच में सहयोग करना और किसी भी आपराधिक गतिविधि से दूर रहना शामिल है।
Case Details
Case Title: Manjeet Kumar vs State of U.P.
Case Number: Criminal Misc. Bail Application No. 5827 of 2026
Judge: Hon’ble Justice Arun Kumar Singh Deshwal
Decision Date: April 16, 2026










