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सुप्रीम कोर्ट: लोन कटौती का हवाला देकर भरण-पोषण नहीं घटेगा, पत्नी को ₹25,000 मासिक देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी के भरण-पोषण को बढ़ाकर ₹25,000 मासिक किया और कहा कि लोन कटौती से पति की जिम्मेदारी कम नहीं होती। - दीपा जोशी बनाम गौरव जोशी

Shivam Y.
सुप्रीम कोर्ट: लोन कटौती का हवाला देकर भरण-पोषण नहीं घटेगा, पत्नी को ₹25,000 मासिक देने का आदेश

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए पत्नी को दिए जाने वाले मासिक भरण-पोषण (maintenance) की राशि बढ़ा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति की आय का सही आकलन करते हुए पत्नी को सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त राशि मिलनी चाहिए।

केस का पृष्ठभूमि

मामला दीपा जोशी बनाम गौरव जोशी से जुड़ा है, जिसमें पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की थी। दोनों की शादी मई 2023 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद वैवाहिक संबंध खराब हो गए और पत्नी को घर छोड़ना पड़ा।

पत्नी ने दावा किया कि उसके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है और वह पूरी तरह भरण-पोषण पर निर्भर है। उसने ₹50,000 मासिक भरण-पोषण की मांग की थी।

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फैमिली कोर्ट ने फरवरी 2025 में ₹8,000 प्रति माह तय किया, जिसे बाद में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बढ़ाकर ₹15,000 कर दिया। इसके बावजूद पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पत्नी की ओर से कहा गया कि ₹15,000 की राशि पति की वास्तविक आय के मुकाबले बहुत कम है। यह भी तर्क दिया गया कि पति की सैलरी से जो कटौतियां (जैसे लोन) दिखाई गई हैं, वे स्वैच्छिक हैं और इन्हें भरण-पोषण कम करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

वहीं, पति की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट पहले ही उचित वृद्धि कर चुका है और उसकी आय पर कई वित्तीय दायित्व हैं, जिन्हें ध्यान में रखना जरूरी है।

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अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य पत्नी को बेसहारा होने से बचाना है और उसे गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर देना है।

बेंच ने कहा,

“पति की आय से लोन की कटौती जैसे खर्च, खासकर जब वे संपत्ति बनाने से जुड़े हों, भरण-पोषण की जिम्मेदारी को कम नहीं कर सकते।”

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी के पास कोई आय नहीं है और उसे सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन करते हुए भरण-पोषण की राशि ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी।

अदालत ने निर्देश दिया कि बकाया राशि तीन महीने के भीतर अदा की जाए और हर महीने की 7 तारीख तक भुगतान किया जाए। इसके साथ ही अपील का निपटारा कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Deepa Joshi vs Gaurav Joshi

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 15662 of 2025

Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Augustine George Masih

Decision Date: April 16, 2026

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