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गोवा हाई कोर्ट ने चाइल्ड केयर लीव CCL नियमों के उल्लंघन को माना, लेकिन समय बीतने से राहत नहीं दी, याचिका हुई निष्प्रभावी घोषित

गोवा हाई कोर्ट ने CCL नीति के उल्लंघन को माना, लेकिन समय बीतने के कारण याचिका को निष्प्रभावी बताते हुए निस्तारित कर दिया। - वैलेंसियो डिसूजा बनाम निदेशक, मनोचिकित्सा एवं मानव व्यवहार संस्थान

Shivam Y.
गोवा हाई कोर्ट ने चाइल्ड केयर लीव CCL नियमों के उल्लंघन को माना, लेकिन समय बीतने से राहत नहीं दी, याचिका हुई निष्प्रभावी घोषित

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में यह माना कि सरकारी अधिकारी द्वारा चाइल्ड केयर लीव (CCL) नीति का पालन नहीं किया गया था। हालांकि, समय बीत जाने के कारण याचिका को अंततः निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित कर दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला के अनुसार, याचिकाकर्ता वेलेंशियो डी’सूजा द्वारा दायर किया गया था। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए चाइल्ड केयर लीव (CCL) से इनकार किए जाने को चुनौती दी थी। उनकी पत्नी, जो गोवा के इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री एंड ह्यूमन बिहेवियर में कार्यरत थीं, ने अपने बेटे की पढ़ाई के लिए 266 दिनों की छुट्टी मांगी थी।

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उन्हें केवल 60 दिनों की छुट्टी दी गई और आगे की छुट्टी देने से इनकार कर दिया गया। बाद में इस निर्णय को गोवा मानवाधिकार आयोग ने भी सही ठहराया, जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई।

न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

अदालत ने कहा कि:

“यदि चाइल्ड केयर लीव को अस्वीकार करना हो, तो संबंधित अधिकारी को मामले को उचित कारणों के साथ मंत्री (कार्मिक) के पास भेजना आवश्यक है।”

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कोर्ट ने पाया कि संबंधित अधिकारी ने यह प्रक्रिया नहीं अपनाई, जो कि नीति का उल्लंघन है।

एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में अदालत ने कहा:

“इस तरह की नीतियां महिलाओं की पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के महत्व को स्वीकार करती हैं, और इन्हें गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।”

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि बच्चे को अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान, खासकर कोविड-19 महामारी के समय, मां की जरूरत थी।

अदालत ने कहा कि इस सहायता से वंचित होना बच्चे के हितों के खिलाफ था और यह नीति के उद्देश्य के विपरीत था।

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हालांकि अदालत ने यह माना कि अधिकारी द्वारा CCL नीति का पालन नहीं किया गया था, लेकिन यह भी कहा कि अब जिस उद्देश्य के लिए छुट्टी मांगी गई थी, वह समाप्त हो चुका है।

कोर्ट ने कहा:

“अब इस याचिका में कोई जीवित मुद्दा शेष नहीं है, क्योंकि जिस उद्देश्य के लिए छुट्टी मांगी गई थी, वह अब प्रासंगिक नहीं रहा।”

इसके साथ ही अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी नीतियों का सही तरीके से पालन किया जाए।

अंततः, याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Valencio D’Souza v. Director, Institute of Psychiatry & Human Behaviour

Case Number: Writ Petition No. 764 of 2023

Judge: Justice Dr. Neela Gokhale

Decision Date: 16 April 2026

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