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लीगल एड में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाई कोर्ट्स को सख्त टाइमलाइन के साथ SOP लागू करने के अनिवार्य निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एड मामलों में देरी रोकने के लिए SOP लागू करने के निर्देश दिए, हाई कोर्ट्स को समयसीमा का पालन अनिवार्य किया। - शंकर महतो बनाम बिहार राज्य

Shivam Y.
लीगल एड में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाई कोर्ट्स को सख्त टाइमलाइन के साथ SOP लागू करने के अनिवार्य निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी सहायता (Legal Aid) मामलों में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए देशभर के हाई कोर्ट्स को एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि समय पर अपील दाखिल न होना न्याय तक पहुंच में बड़ी बाधा बन रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला शंकर महतो बनाम बिहार राज्य से जुड़ा है, जिसमें पहले एक आपराधिक अपील के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि कानूनी सहायता पाने वाले कैदियों की अपील दाखिल करने में अत्यधिक देरी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी के कारणों को समझने के लिए अमिकस क्यूरी नियुक्त किया और विभिन्न एजेंसियों जैसे सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी (SCLSC), NALSA और हाई कोर्ट्स से सुझाव मांगे।

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रिकॉर्ड से पता चला कि देरी के पीछे कई कारण हैं अधूरे दस्तावेज, अनुवाद में समय, वकीलों द्वारा विलंब और सिस्टम में समन्वय की कमी।

सुनवाई के दौरान बेंच ने स्पष्ट कहा कि तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद देरी होना स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने कहा,

“सूचना और संचार तकनीक के उपलब्ध साधनों के बावजूद ऐसी देरी जारी रहने का कोई कारण नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कानूनी सहायता केवल नीति नहीं बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है, जो समान न्याय सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

अमिकस क्यूरी द्वारा तैयार SOP में कानूनी सहायता मामलों के लिए स्पष्ट टाइमलाइन और जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

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इसमें शामिल प्रमुख बिंदु:

  • दस्तावेजों का समयबद्ध अनुवाद और डिजिटाइजेशन
  • हाई कोर्ट, जेल प्रशासन और लीगल सर्विस संस्थाओं के बीच डिजिटल समन्वय
  • मामलों को प्राथमिकता के आधार पर वर्गीकृत करना
  • हर चरण के लिए निश्चित समयसीमा तय करना

SOP का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपील दाखिल करने में अनावश्यक देरी न हो और कैदियों को समय पर न्याय मिल सके।

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अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

  • SOP को सभी हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों के सामने रखा जाए और आवश्यक बदलाव लागू किए जाएं।
  • SOP में तय टाइमलाइन बाध्यकारी (binding) होंगी और उनका पालन अनिवार्य होगा।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने और निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए।
  • सभी संबंधित संस्थाओं को 30 अप्रैल 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था न्याय तक पहुंच में मौजूद संरचनात्मक खामियों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

Case Details

Case Title: Shankar Mahto vs State of Bihar

Case Number: Criminal Appeal (arising out of SLP (Crl.) & Crl.MP No. 7862/2017)

Judge: Justice Sanjay Karol & Justice N. Kotiswar Singh

Decision Date: 16th April, 2026

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