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केरल हाई कोर्ट: को-ऑपरेटिव बैंक की स्लिप भी ‘चेक’ मानी जा सकती है, NI Act केस रद्द करने से इनकार

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक की विथड्रॉल स्लिप भी चेक मानी जा सकती है और धारा 138 के केस को रद्द करने से इनकार किया। - क्लारा डोमिनिक बनाम टॉमी ईपेन और अन्य।

Shivam Y.
केरल हाई कोर्ट: को-ऑपरेटिव बैंक की स्लिप भी ‘चेक’ मानी जा सकती है, NI Act केस रद्द करने से इनकार

केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल किसी दस्तावेज़ को “विथड्रॉल स्लिप” कह देने से वह कानून के दायरे से बाहर नहीं हो जाता। यदि उसका स्वरूप भुगतान आदेश जैसा है, तो उसे चेक माना जा सकता है। अदालत ने इसी आधार पर धारा 138 एनआई एक्ट के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक शिकायत से जुड़ा है जिसमें आरोप था कि आरोपी द्वारा जारी किया गया भुगतान दस्तावेज़ बाउंस हो गया। इसके बाद धारा 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

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आरोपी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित दस्तावेज़ कोई चेक नहीं बल्कि एक “विथड्रॉल स्लिप” है, जिसे कथित तौर पर शिकायतकर्ता ने गलत तरीके से इस्तेमाल किया। यह भी कहा गया कि संबंधित को-ऑपरेटिव सोसाइटी, बैंक की परिभाषा में नहीं आती, इसलिए मामला कानूनन टिकता ही नहीं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस सी.एस. डायस की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी नाम (नॉमेनक्लेचर) के आधार पर किसी दस्तावेज़ की कानूनी प्रकृति तय नहीं की जा सकती।

अदालत ने कहा,

“मूल बात यह है कि दस्तावेज़ भुगतान के लिए आदेश का काम करता है या नहीं, न कि उसे क्या नाम दिया गया है।”

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कोर्ट ने यह भी माना कि को-ऑपरेटिव सोसाइटी, यदि बैंकिंग जैसी गतिविधियाँ कर रही है—जैसे जमा स्वीकार करना और भुगतान की सुविधा देना तो उसे व्यापक अर्थ में “बैंकर” माना जा सकता है।

पीठ ने कहा,

“यदि कोई संस्था बैंकिंग कार्य कर रही है, तो केवल लाइसेंस की कमी का हवाला देकर उसे कानून से बाहर नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट ने पहले के न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि “बैंकर” की परिभाषा व्यापक है। इसमें केवल पारंपरिक बैंक ही नहीं, बल्कि वे संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं जो बैंकिंग जैसी सेवाएं देती हैं।

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इसी आधार पर अदालत ने माना कि यदि कोई विथड्रॉल स्लिप व्यवहार में भुगतान आदेश की तरह काम करती है, तो वह एनआई एक्ट के दायरे में आ सकती है।

अदालत ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि शिकायत को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।

हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी ट्रायल कोर्ट में अन्य सभी कानूनी बचाव (defences) उठाने के लिए स्वतंत्र है।

अंत में पीठ ने निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट मामले का निपटारा अपने गुण-दोष के आधार पर और कानून के अनुसार करे।

Case Details

Case Title: Clara Dominic v. Tomy Eapen & Ors.

Case Number: CRL.MC No. 1782 of 2026

Judge: Justice C.S. Dias

Decision Date: March 26, 2026

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