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रिश्वत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मांग और स्वीकार दोनों साबित, केरल अधिकारी की दोषसिद्धि बहाल

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Vivek G.
रिश्वत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मांग और स्वीकार दोनों साबित, केरल अधिकारी की दोषसिद्धि बहाल

नई दिल्ली में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम भ्रष्टाचार मामले में केरल सरकार की अपील स्वीकार करते हुए आरोपी अधिकारी की दोषसिद्धि बहाल कर दी। अदालत ने कहा कि मांग (demand) और रकम स्वीकार करने के पर्याप्त प्रमाण रिकॉर्ड पर मौजूद हैं।

Background of Case

मामला एक राशन डीलर (ARD) से जुड़ा है, जिसे अपने रिकॉर्ड (Abstract) पर काउंटरसाइन कराने के लिए तालुक सप्लाई ऑफिसर (TSO) के पास जाना होता था। आरोप था कि अधिकारी ने ₹500 की रिश्वत मांगी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में हाई कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी को बरी कर दिया कि “रिश्वत की मांग साबित नहीं हो पाई।”

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति संजय कुमार ने रिकॉर्ड पर मौजूद गवाहों के बयान और ट्रैप कार्यवाही का विस्तार से विश्लेषण किया।

अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता (PW1) ने कुछ जगहों पर विरोधाभासी बयान दिए, लेकिन उसकी पूरी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा:

“केवल इसलिए कि गवाह आंशिक रूप से मुकर गया, उसकी विश्वसनीय हिस्सों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि:

शिकायत दर्ज होने की प्रक्रिया साबित हुई

ट्रैप कार्यवाही सही तरीके से हुई

स्वतंत्र गवाहों और अधिकारी (PW2 और PW17) ने शिकायत की पुष्टि की

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सबसे अहम बात यह रही कि आरोपी द्वारा ₹500 स्वीकार करना “स्पष्ट रूप से स्थापित” था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में “मांग और स्वीकार करना” दोनों जरूरी तत्व हैं।

कोर्ट ने पाया कि:

शिकायतकर्ता ने विजिलेंस के सामने रिश्वत मांगने की बात कही थी

वही बयान कोर्ट में भी आंशिक रूप से पुष्ट हुआ

स्वतंत्र गवाहों ने भी इसे समर्थन दिया

अदालत ने कहा:

“रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि आरोपी ने पहले रिश्वत की मांग की थी।”

आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि पैसा किसी और को देने के लिए लिया गया था या यह कर्ज लौटाया जा रहा था।

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कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि:

“स्वीकार करने के संबंध में दिया गया स्पष्टीकरण असंगत और अविश्वसनीय है।”

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया और ट्रायल कोर्ट की सजा बहाल कर दी।

अदालत ने कहा कि सजा पहले से ही न्यूनतम है, इसलिए उसमें किसी बदलाव की जरूरत नहीं है।

Case Details

Case Title: State of Kerala vs K.A. Abdul Rasheed

Case Number: Criminal Appeal (arising from SLP (Crl.) No. 1808 of 2026)

Judge: Justice K. Vinod Chandran with Justice Sanjay Kumar

Decision Date: April 15, 2026

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