मुंबई में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने टैक्स विभाग की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने पाया कि बिना पर्याप्त कारण और प्रक्रिया का पालन किए एक कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे, जो कानून के खिलाफ है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका Nivara Infradevelopers LLP द्वारा दायर की गई थी, जिसमें 23 जनवरी 2026 को जारी बैंक खातों के अस्थायी अटैचमेंट आदेश को चुनौती दी गई थी। विभाग ने जीएसटी कानून की धारा 83 के तहत कंपनी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था।
याचिकाकर्ता का कहना था कि यह कार्रवाई बिना किसी ठोस आधार और बिना उचित “मत (opinion)” बनाए की गई, जबकि कानून इसके लिए स्पष्ट शर्तें तय करता है।
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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने स्पष्ट कहा कि इस तरह का बैंक खाता अटैचमेंट “कठोर (draconian)” कार्रवाई है और इसे हल्के में नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा:
“प्रोविजनल अटैचमेंट से पहले अधिकारी को ठोस सामग्री के आधार पर यह राय बनानी जरूरी है कि राजस्व की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है।”
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पीठ ने पाया कि:
- अटैचमेंट से पहले कोई ठोस कारण रिकॉर्ड में नहीं था
- प्री-नोटिस भी अस्पष्ट और अधूरा था
- याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया
अदालत ने टिप्पणी की:
“कानून की अनदेखी करते हुए इस प्रकार की कार्रवाई नागरिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों को कानून के दायरे में रहकर ही शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
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पीठ ने कहा:
“जब कानून इतनी कठोर शक्ति देता है, तो उसका प्रयोग भी उतनी ही सावधानी से होना चाहिए, न कि मनमाने तरीके से।”
यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने वैकल्पिक सुरक्षा देने का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन विभाग ने उस पर कोई विचार नहीं किया।
अदालत ने अंत में स्पष्ट आदेश दिया:
- 23 जनवरी 2026 के अटैचमेंट आदेश रद्द किए जाते हैं
- विभाग को स्वतंत्रता दी गई कि यदि ठोस सामग्री हो तो नया कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है
- सभी पक्षों के अधिकार भविष्य की कार्यवाही के लिए सुरक्षित रखे गए
इस प्रकार, अदालत ने कहा कि बिना प्रक्रिया का पालन किए की गई कार्रवाई कानून में टिक नहीं सकती।
Case Details
Case Title: Nivara Infradevelopers LLP vs Union of India & Ors.
Case Number: Writ Petition (L) No. 7888 of 2026
Judge: Justice G. S. Kulkarni & Justice Aarti Sathe
Decision Date: 2 April 2026










