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दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल ट्रांसफर की मांग ठुकराई, कहा - सिर्फ प्रक्रिया बदलाव से पक्षपात का संदेह उचित नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल ट्रांसफर की मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रक्रिया में बदलाव से पक्षपात का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। - बलबीर चंद तिवारी बनाम सीबीआई एवं अन्य; सुखमोहिंदर सिंह संधू बनाम सीबीआई और अन्य।

Shivam Y.
दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल ट्रांसफर की मांग ठुकराई, कहा - सिर्फ प्रक्रिया बदलाव से पक्षपात का संदेह उचित नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि केवल प्रक्रिया में बदलाव से न्यायिक पक्षपात का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने ट्रायल ट्रांसफर की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की आशंका वास्तविक आधार पर नहीं टिकी है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका उन आरोपियों द्वारा दायर की गई थी जो “सीबीआई बनाम सुमेध सिंह सैनी व अन्य” मामले में ट्रायल का सामना कर रहे हैं। मामला काफी पुराना है और वर्तमान में अंतिम बहस के चरण में है।

पहले, ट्रायल कोर्ट ने निर्देश दिया था कि बहस पहले धारा 197 CrPC(सरकारी अनुमति) के मुद्दे पर होगी। बाद में, नए प्रीसाइडिंग ऑफिसर ने निर्णय लिया कि अंतिम बहस एक साथ-सभी मुद्दों पर-सुनी जाएगी।

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याचिकाकर्ताओं ने इस बदलाव को लेकर चिंता जताई और आरोप लगाया कि इससे उन्हें निष्पक्ष सुनवाई मिलने पर संदेह उत्पन्न हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने मामले को किसी अन्य अदालत में ट्रांसफर करने की मांग की।

न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि यह “अवास्तविक, आधारहीन और गलत” है।

अदालत ने स्पष्ट किया:

“सिर्फ यह तथ्य कि अदालत अब अंतिम बहस व्यापक रूप से सुनना चाहती है, इससे किसी प्रकार का पक्षपात या पूर्वनिर्धारित परिणाम नहीं माना जा सकता।”

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कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार है कि वह किस प्रकार से बहस सुने। यह उसके विवेक और अधिकार क्षेत्र में आता है।

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले (कनकलता बनाम राज्य) का हवाला दिया, जिसमें ट्रांसफर की अनुमति दी गई थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि उस मामले की परिस्थितियां पूरी तरह अलग थीं। वहां ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां इतनी तीखी थीं कि निष्पक्षता पर वास्तविक संदेह पैदा हुआ था।

इस मामले में, अदालत ने कहा कि ऐसा कोई तत्व मौजूद नहीं है जो ट्रांसफर को उचित ठहराए।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ट्रायल ट्रांसफर का आदेश सामान्य रूप से नहीं दिया जाना चाहिए।

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पीठ ने कहा:

“ऐसा आदेश संबंधित न्यायाधीश पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इसे केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दिया जाना चाहिए।”

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को “अत्यधिक संवेदनशील” बताते हुए कहा कि उन्होंने अदालत की मंशा को गलत तरीके से समझ लिया।

अदालत ने पाया कि 17 मार्च 2026 के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

इसलिए, ट्रायल को किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं बनता।

दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

Case Details

Case Title:

  • Balbir Chand Tiwari vs CBI & Ors.
  • Sukhmohinder Singh Sandhu vs CBI & Ors.

Case Number: CRL.M.C. 2674/2026 & CRL.M.C. 2694/2026

Judge: Justice Manoj Jain

Decision Date: April 9, 2026

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