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सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु भूमि मामले में निष्पक्ष सुनवाई की रक्षा की, कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट की टिप्पणियों से पक्षों पर पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट की टिप्पणियां संपत्ति के टाइटल पर अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं और उन्हें अन्य मामलों में उपयोग नहीं किया जा सकता। - रवि काला और अन्य बनाम मेसर्स कैसाब्लांका एस्टेट और अन्य।

Shivam Y.
सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु भूमि मामले में निष्पक्ष सुनवाई की रक्षा की, कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट की टिप्पणियों से पक्षों पर पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए।

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में की गई कुछ टिप्पणियों को संपत्ति के अधिकार (टाइटल) पर अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ये टिप्पणियां रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं थीं और इन्हें आगे की कार्यवाही में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला बेंगलुरु के उलसूर झील के पास स्थित एक विवादित संपत्ति से जुड़ा है, जहां तीन अलग-अलग पक्ष अपने-अपने स्वामित्व का दावा कर रहे हैं।

अपीलकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह संपत्ति अपने दादा से विरासत में मिली, जबकि अन्य पक्ष पुराने नीलामी रिकॉर्ड के आधार पर दावा कर रहे हैं। वहीं, एक कंपनी ने यह दावा किया कि उसकी खरीदी गई जमीन (सर्वे नंबर 104) अलग है, लेकिन उसी का PID नंबर विवादित संपत्ति से मेल खाता है।

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इस विवाद के चलते कई मुकदमे दायर हुए, जिनमें से एक में हाईकोर्ट ने वादी का दावा खारिज कर दिया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय करोल, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कुछ तथ्यों को गलत तरीके से दर्ज किया।

अदालत ने स्पष्ट किया:

“रिकॉर्ड से यह साफ है कि संबंधित पक्ष ने कभी यह दावा नहीं किया कि सर्वे नंबर 102 और 103, सर्वे नंबर 104 के समान हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने 2015 के अपने ही आदेश की गलत व्याख्या की। उस आदेश में केवल यह कहा गया था कि स्वामित्व का फैसला सिविल कोर्ट करेगा, न कि किसी पक्ष के अधिकार को मान्यता दी गई थी।

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पीठ ने यह भी माना कि ऐसी गलत टिप्पणियां आगे चलकर पक्षकारों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं और अन्य मामलों में गलत तरीके से इस्तेमाल की जा सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

“हाईकोर्ट के आदेश की संबंधित टिप्पणियों को संपत्ति के स्वामित्व, पहचान या स्थान पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा।”

हालांकि, अदालत ने हाईकोर्ट के उस अंतिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया जिसमें वाद (plaint) खारिज किया गया था।

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अदालत ने निर्देश दिया कि:

  • विवादित टिप्पणियों का किसी भी लंबित या भविष्य के मामले में उपयोग नहीं किया जाएगा
  • संपत्ति से जुड़ा वास्तविक विवाद सक्षम सिविल कोर्ट द्वारा साक्ष्य और दलीलों के आधार पर तय किया जाएगा

इसी के साथ अपीलों का निस्तारण कर दिया गया और किसी भी पक्ष पर लागत (cost) नहीं लगाई गई।

Case Details

Case Title: Ravi Kala & Anr. vs M/s Casablanca Estate & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) Nos. 19212–19213 of 2024

Judges: Justice Sanjay Karol & Justice Augustine George Masih

Decision Date: April 16, 2026

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