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कलकत्ता हाई कोर्ट ने उम्र सीमा के बावजूद सरोगेसी में राहत दी, दंपति के लिए फास्ट-ट्रैक सर्टिफिकेट का आदेश दिया।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने उम्र सीमा पार होने के बावजूद एक दंपत्ति को सरोगेसी की अनुमति देते हुए एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया। - संगीता राहा एवं अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं अन्य

Rajan Prajapati
कलकत्ता हाई कोर्ट ने उम्र सीमा के बावजूद सरोगेसी में राहत दी, दंपति के लिए फास्ट-ट्रैक सर्टिफिकेट का आदेश दिया।

कलकत्ता हाईकोर्ट के जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच में एक संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक दंपत्ति को सरोगेसी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति देते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मामला एक ऐसे दंपत्ति से जुड़ा था जो लंबे समय से संतान प्राप्ति के प्रयास में थे लेकिन प्राकृतिक और मेडिकल दोनों तरीकों से सफलता नहीं मिल सकी।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता संगिता राहा और उनके पति ने बताया कि उनकी शादी 2019 में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी, जिसे बाद में 2025 में विधिवत पंजीकृत किया गया। कई वर्षों तक संतान प्राप्ति के प्रयास करने के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) का सहारा लिया।

हालांकि IVF प्रक्रिया भी सफल नहीं रही, जिसके बाद दंपत्ति ने सरोगेसी का विकल्प चुना। इसके लिए उन्होंने 2025 में “मेडिकल इंडिकेशन सर्टिफिकेट” के लिए आवेदन किया। उस समय पत्नी निर्धारित उम्र सीमा के भीतर थीं, जबकि पति उम्र सीमा से थोड़ा ऊपर थे।

इसके बावजूद, जब उन्होंने “एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट” के लिए आवेदन किया, तो राज्य की ओर से यह कहते हुए आपत्ति उठाई गई कि अब दंपत्ति उम्र सीमा पार कर चुके हैं और नियमों में बदलाव संभव नहीं है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने मामले की परिस्थितियों को ध्यान से सुना। अदालत ने यह पाया कि जब दंपत्ति ने पहली बार आवेदन किया था, तब पत्नी निर्धारित उम्र सीमा के भीतर थीं।

अदालत ने यह भी नोट किया कि दंपत्ति के एम्ब्रियो (भ्रूण) पहले ही सफलतापूर्वक क्रायोप्रिजर्व (सुरक्षित) किए जा चुके हैं और मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार सरोगेसी से गर्भधारण की “उचित संभावना” मौजूद है।

न्यायालय ने अपने अवलोकन में कहा,

“ऐसी विशेष परिस्थितियों में याचिकाकर्ताओं को केवल उम्र सीमा के कारण वंचित करना उचित नहीं होगा, खासकर जब उन्होंने पहले ही पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।”

अदालत ने अपने पहले के फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें समान परिस्थितियों में दंपत्तियों को राहत दी गई थी।

मामले के सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित प्राधिकरण याचिकाकर्ताओं को सरोगेसी प्रक्रिया के लिए आवश्यक “एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट” जारी करे।

न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया कि यह प्रमाणपत्र सात कार्य दिवसों के भीतर जारी किया जाए ताकि दंपत्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकें।

Case Details

Case Title: Sangita Raha & Anr. vs The State of West Bengal & Ors.

Case Number: WPA 481 of 2026

Judge: Justice Raja Basu Chowdhury

Decision Date: April 16, 2026

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