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मजदूरों के बकाया भुगतान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कंपनियों की संपत्तियों के उपयोग पर दिया अहम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मजदूरों के बकाया भुगतान मामले में कंपनियों को संपत्तियों के जरिए भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी जोर दिया। - भारतीय मजदूर संघ, उ.प्र. और अन्य. बनाम यूपी राज्य एवं अन्य

Shivam Y.
मजदूरों के बकाया भुगतान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कंपनियों की संपत्तियों के उपयोग पर दिया अहम आदेश

लंबे समय से लंबित मजदूरों के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती और बकाया राशि के भुगतान के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला भारतीय मजदूर संघ, उत्तर प्रदेश बनाम राज्य उत्तर प्रदेश एवं अन्य से जुड़ा है, जिसमें मजदूर संगठनों ने आरोप लगाया था कि M/s जयपुर उद्योग लिमिटेड और उसकी इकाइयों, जिनमें कानपुर जूट उद्योग शामिल है, के कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन और अन्य देयक नहीं मिले।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि:

  • मजदूरों का बकाया तुरंत चुकाया जाए,
  • पूर्व में दिए गए अवॉर्ड को लागू किया जाए,
  • कंपनी की संपत्तियों को बेचकर श्रमिकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

मामले का इतिहास काफी जटिल रहा है और इसमें कई वर्षों से अलग-अलग कार्यवाहियां चलती रही हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों की वित्तीय स्थिति, संपत्तियों की बिक्री, और मजदूरों के बकाया की गणना जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया।

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अदालत ने यह भी देखा कि संबंधित कंपनियों की ओर से प्रस्तुत पुनर्वास योजना, संपत्तियों की बिक्री और निवेशकों के प्रस्तावों का क्या प्रभाव पड़ता है।

पीठ ने कहा,

“मजदूरों के वैध अधिकारों की रक्षा करना न्यायालय का दायित्व है, और देरी को उचित ठहराया नहीं जा सकता।”

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कंपनियों द्वारा संपत्तियों के प्रबंधन और बिक्री की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि श्रमिकों को उनका बकाया समय पर मिल सके।

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विचार किए गए प्रमुख मुद्दे

  • मजदूरों के बकाया वेतन और अन्य देयकों की गणना
  • कंपनी की संपत्तियों की स्थिति और उनकी बिक्री
  • पुनर्वास योजना की व्यवहारिकता
  • संभावित निवेशकों के प्रस्ताव
  • लंबित कंपनी याचिकाओं का प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मजदूरों के बकाया भुगतान को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। अदालत ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे संपत्तियों और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर श्रमिकों के दावों का निपटारा सुनिश्चित करें।

इसके साथ ही, कोर्ट ने प्रशासनिक निगरानी के लिए आवश्यक व्यवस्था करने और प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के निर्देश भी दिए।

Case Details

Case Title: Bhartiya Mazdoor Sangh, U.P. & Anr. vs State of U.P. & Others

Case Number: Writ Petition (Civil) No. 392 of 2015

Judge: Justice Rajesh Bindal and Justice Vijay Bishnoi

Decision Date: April 15, 2026.

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