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LLb छात्रा पर फर्जी वकालत कर ठगी का आरोप, गुजरात हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका ठुकराई

गुजरात हाई कोर्ट ने फर्जी वकील बनकर ठगी के आरोप में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, कहा मामले में गहन पूछताछ जरूरी है। - साधु फाल्गुनी मितेशकुमार बनाम गुजरात राज्य

Shivam Y.
LLb छात्रा पर फर्जी वकालत कर ठगी का आरोप, गुजरात हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका ठुकराई

अहमदाबाद स्थित गुजरात हाई कोर्ट में बुधवार को एक अहम सुनवाई के दौरान कथित रूप से फर्जी वकालत कर लोगों से लाखों रुपये लेने के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता और जांच की आवश्यकता को देखते हुए राहत देना उचित नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला C.R. No. 11206020260116/2026 से जुड़ा है, जो महेसाणा जिले के कड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था। आरोपी साधु फाल्गुनी मितेश कुमार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। बताया गया कि शिकायत में घटना जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच की है, लेकिन FIR देर से दर्ज हुई और देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया।

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यह भी कहा गया कि आरोपी एलएलबी के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं और केवल अपने रिश्तेदार अधिवक्ता के काम में मदद करती थीं। उन्होंने अदालत में कभी पेशी नहीं दी और न ही वकालतनामा दाखिल किया।

राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि जांच के दौरान आरोपी के पास से वकील के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे कई दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई है।

इनमें फर्जी पहचान पत्र, विभिन्न पुलिस स्टेशनों की मुहरें, नोटरी से संबंधित रजिस्टर और सील, तथा विजिटिंग कार्ड शामिल हैं। साथ ही, कई अन्य पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

अभियोजन ने दावा किया कि आरोपी और अन्य सह-आरोपियों ने मिलकर लगभग 80 लाख रुपये तक की ठगी की है।

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माननीय न्यायमूर्ति पी. एम. रावल ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया गंभीर संदेह पैदा करती है।

अदालत ने कहा,

“वकालत एक सम्मानजनक पेशा है और इसे इस प्रकार बदनाम होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

न्यायालय ने यह भी माना कि मामले की गहराई तक पहुंचने और अन्य संभावित पीड़ितों का पता लगाने के लिए आरोपी से पूछताछ आवश्यक है।

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अदालत ने पाया कि इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत देने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति मौजूद नहीं है।

“संविधान पीठ के सिद्धांतों के आधार पर यह मामला अग्रिम जमानत के योग्य नहीं है,” अदालत ने स्पष्ट किया।

इसके साथ ही, अदालत ने याचिका खारिज कर दी और आदेश पर रोक लगाने की मांग भी अस्वीकार कर दी।

Case Details

Case Title: Sadhu Falguni Miteshkumar vs State of Gujarat

Case Number: R/Criminal Misc. Application No. 5522 of 2026

Judge: Justice P. M. Raval

Decision Date: 08 April 2026

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