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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कर्मचारी को मिला ‘हिल कैडर’ का अधिकार, यूपी सरकार को तुरंत पुनः आवंटन का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी को उसके विकल्प के अनुसार उत्तराखंड कैडर देने का आदेश दिया, हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर ₹1 लाख लागत भी लगाई। - राजेंद्र सिंह बोरा बनाम भारत संघ और अन्य।

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कर्मचारी को मिला ‘हिल कैडर’ का अधिकार, यूपी सरकार को तुरंत पुनः आवंटन का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से लंबित सेवा विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि एक कर्मचारी को उसके मूल विकल्प के अनुसार कैडर आवंटन से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला राजेंद्र सिंह बोरा से जुड़ा है, जिन्होंने 1995 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा परीक्षा पास की थी। उन्होंने आवेदन के समय ‘हिल एरिया’ (पहाड़ी क्षेत्र) को प्राथमिकता दी थी।

हालांकि, तकनीकी कारणों से उनकी नियुक्ति में देरी हुई और बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश में नियुक्त किया गया। उन्होंने कई बार अधिकारियों को आवेदन देकर उत्तराखंड (पहाड़ी क्षेत्र) में कैडर बदलने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

आखिरकार, उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने साफ कहा कि “ट्रांसफर और कैडर परिवर्तन दो अलग-अलग चीजें हैं और इन्हें एक जैसा नहीं माना जा सकता।”

अदालत ने समझाया कि ट्रांसफर केवल पोस्टिंग बदलता है, जबकि कैडर परिवर्तन सेवा की पूरी संरचना को प्रभावित करता है।

पीठ ने यह भी नोट किया कि परीक्षा राज्य पुनर्गठन से पहले हुई थी और यदि उस समय सही तरीके से नियुक्ति होती, तो कर्मचारी को ‘हिल कैडर’ मिल सकता था।

अदालत ने कहा कि सरकारी नीति के अनुसार कैडर आवंटन में विकल्प (option), निवास (domicile) और वरिष्ठता महत्वपूर्ण आधार होते हैं।

साथ ही, अदालत ने यह भी माना कि कर्मचारी के बेटे की मानसिक स्थिति (cognitive disability) एक विशेष परिस्थिति है, जिसे नीति में ‘मेडिकल हार्डशिप’ के रूप में मान्यता दी गई है।

पीठ ने टिप्पणी की, “ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारी के विकल्प को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”

अदालत ने इस मामले में देरी पर गंभीर चिंता जताई।

पीठ ने कहा,

“1997 से लेकर 2026 तक, एक कर्मचारी को अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ा-यह राज्य की उदासीनता को दर्शाता है।”

अदालत ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट ने 2004 में नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया था, तो नियुक्ति में इतनी देरी नहीं होनी चाहिए थी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए अपील स्वीकार कर ली।

अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि कर्मचारी का कैडर तत्काल उत्तराखंड में पुनः आवंटित किया जाए।

साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि उनकी वरिष्ठता और सभी सेवा लाभ सुरक्षित रहेंगे।

इसके अलावा, राज्य सरकार को कर्मचारी को ₹1,00,000 की लागत (compensation) चार सप्ताह के भीतर देने का आदेश दिया गया।

Case Details

Case Title: Rajendra Singh Bora vs Union of India & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 29304 of 2018

Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh

Decision Date: April 22, 2026

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