दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से जुड़े यौन अपराध और POCSO कानून के तहत दर्ज मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बाद में हुई शादी ऐसे आरोपों की गंभीरता को कम नहीं कर सकती।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला थाना जामिया नगर में दर्ज FIR संख्या 167/2025 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह लगभग 16 वर्ष की उम्र में आरोपी के संपर्क में आई थी।
शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने शादी का आश्वासन देकर उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान वह गर्भवती भी हुई और गर्भपात कराया गया। बाद में, बालिग होने पर जब आरोपी ने शादी से इनकार किया, तब शिकायत दर्ज कराई गई।
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आरोपी की ओर से दलील दी गई कि अब दोनों के बीच विवाह हो चुका है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने ट्रायल कोर्ट में अपने बयान में कोई शिकायत नहीं होने की बात कही है और उसने यह भी दावा किया कि उसे शिकायत की सामग्री की जानकारी नहीं थी।
शिकायतकर्ता ने भी जमानत का समर्थन करते हुए कहा कि शिकायत उसके वकील द्वारा तैयार की गई थी और उसने उसे पढ़ा नहीं था।
वहीं, राज्य की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया। अभियोजन ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता कानून की छात्रा है, इसलिए यह मानना कठिन है कि उसे शिकायत की सामग्री की जानकारी नहीं थी।
न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया ने कहा कि शिकायतकर्ता के इस दावे पर prima facie विश्वास करना कठिन है कि उसने इतनी गंभीर शिकायत बिना पढ़े ही दे दी।
अदालत ने यह भी नोट किया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 CrPC के तहत दर्ज बयान में शिकायतकर्ता ने FIR में लगाए गए आरोपों को दोहराया था। बाद में दिए गए स्पष्टीकरण को अदालत ने इस स्तर पर स्वीकार करना उचित नहीं माना।
शादी के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि यह विवाह उस समय हुआ जब आरोपी हिरासत में था।
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अदालत ने कहा,
“इस प्रकार का विवाह आरोपी को उन कथित कृत्यों से मुक्त नहीं करता, जो तब हुए जब शिकायतकर्ता नाबालिग थी।”
सभी परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कहा कि यह जमानत देने का उपयुक्त मामला नहीं है।
अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
Case Details:
Case Title: Gayassudin vs State of NCT of Delhi
Case Number: Bail Appln. 1087/2026
Judge: Justice Girish Kathpalia
Decision Date: April 9, 2026










