मेन्यू
समाचार खोजें...
होमSaved

डबल मर्डर केस में आरोपी को राहत: गुजरात हाईकोर्ट ने सबूतों की कड़ी अधूरी मानते हुए दोषसिद्धि पर उठाए सवाल

गुजरात हाईकोर्ट ने डबल मर्डर केस में कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी अधूरी है, इसलिए आरोपी के खिलाफ मामला संदेह से परे साबित नहीं हुआ। - गुजरात राज्य बनाम बलदेवभाई बूढ़ाजी धुलाजी चौहान (ठाकोर)

Shivam Y.
डबल मर्डर केस में आरोपी को राहत: गुजरात हाईकोर्ट ने सबूतों की कड़ी अधूरी मानते हुए दोषसिद्धि पर उठाए सवाल

अहमदाबाद स्थित गुजरात हाईकोर्ट ने एक सनसनीखेज दोहरे हत्या मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष तय करने के लिए पूरी और ठोस कड़ी जरूरी है। अदालत ने पाया कि इस मामले में कई महत्वपूर्ण कड़ियाँ साबित नहीं हो पाईं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2017 का है, जिसमें अहमदाबाद के ओढव इलाके में रहने वाले विपुलभाई और उनकी मां कंचनबेन की हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी बलदेवभाई चौहान को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड दिया था।

अभियोजन के अनुसार, आरोपी का मृतक की पत्नी के साथ संबंध था और इसी विवाद के चलते उसने दोनों की हत्या कर दी।

Read also:- इंस्टाग्राम रील मामले में राहत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा पहली नजर में वैमनस्य नहीं, आरोपियों को मिली जमानत

हाईकोर्ट की पीठ (न्यायमूर्ति इलेश जे. वोरा और न्यायमूर्ति आर.टी. वच्छाणी) ने मामले की गहराई से समीक्षा की और पाया कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, जिसमें कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था।

अदालत ने कहा,

"अभियोजन पक्ष को साक्ष्यों की एक पूरी श्रृंखला स्थापित करनी होगी... 'सच हो सकता है' और 'सच होना ही चाहिए' के ​​बीच का अंतर महत्वपूर्ण है।"

कोर्ट ने विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर संदेह जताया:

  • लास्ट सीन थ्योरी साबित नहीं हुई: जिस गवाह के जरिए आरोपी को घटना स्थल से जाते हुए दिखाया गया था, उसने कोर्ट में बयान का समर्थन नहीं किया।
  • CCTV साक्ष्य कमजोर: इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए जरूरी कानूनी प्रमाण (Section 65B certificate) प्रस्तुत नहीं किया गया।
  • हथियार बरामदगी पर संदेह: पंच गवाहों ने बरामदगी का समर्थन नहीं किया।
  • कथित स्वीकारोक्ति अमान्य: पुलिस के सामने किया गया बयान कानूनन स्वीकार्य नहीं माना गया।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने सजा बरकरार रखते हुए आरोपियों को दी राहत, प्रोबेशन का लाभ देकर जेल से बचाया

कोर्ट ने स्पष्ट कहा,

पुलिस के समक्ष दिए गए इकबालिया बयान को ठोस सबूत के रूप में नहीं माना जा सकता।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के मामलों में हर कड़ी का पूरी तरह साबित होना जरूरी है।

कोर्ट ने कहा कि:

  • सभी परिस्थितियां केवल आरोपी की ओर ही संकेत करें
  • कोई वैकल्पिक संभावना न बचे
  • साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी तरह से जुड़ी हो

Read also:- दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल ट्रांसफर याचिका खारिज की, कहा - केवल प्रतिकूल आदेश से पक्षपात साबित नहीं होता

इस मामले में अदालत ने पाया कि कई कड़ियाँ या तो टूटी हुई हैं या साबित ही नहीं हुईं।

इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ “संदेह से परे” मामला साबित करने में असफल रहा।

अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा केवल अनुमान और अधूरी कड़ियों के आधार पर दोषसिद्धि करना उचित नहीं था।

Case Details:

Case Title: State of Gujarat vs. Baldevbhai Budhaji Dhulaji Chauhan (Thakor)

Case Number: Criminal Confirmation Case No. 2 of 2024 with Criminal Appeal No. 2812 of 2024

Judges: Justice Ilesh J. Vora & Justice R.T. Vachhani

Decision Date: 10 April 2026

More Stories