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इंस्टाग्राम रील मामले में राहत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा पहली नजर में वैमनस्य नहीं, आरोपियों को मिली जमानत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंस्टाग्राम रील के आधार पर दर्ज मामले में कहा कि वैमनस्य का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता, और आरोपियों को जमानत दे दी। - वसीम खान और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य

Shivam Y.
इंस्टाग्राम रील मामले में राहत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा पहली नजर में वैमनस्य नहीं, आरोपियों को मिली जमानत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर दर्ज आपराधिक मामले में आरोपियों को राहत देते हुए जमानत मंजूर कर दी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से prima facie ऐसा प्रतीत नहीं होता कि आरोपियों ने विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाया हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला थाना कोतवाली, रायसेन में दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर एक रील पोस्ट की थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि वीडियो में दिए गए कथनों से सामाजिक वैमनस्य फैल सकता है। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया।

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आरोपियों को 8 मार्च 2026 से न्यायिक हिरासत में रखा गया था। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि आरोप निराधार हैं और केवल एक वीडियो के आधार पर गंभीर अपराध नहीं बनता।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे ने केस डायरी और उपलब्ध सामग्री का अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ मुख्य साक्ष्य केवल एक इंस्टाग्राम रील है।

अदालत ने कहा,

“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि उक्त सामग्री विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य या घृणा को बढ़ावा देती है।”

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कोर्ट ने आगे यह भी नोट किया कि वीडियो में व्यक्त विचार एक विदेशी देश के समर्थन में विरोध प्रदर्शन जैसे प्रतीत होते हैं, न कि किसी विशेष समुदाय के खिलाफ उकसावे के रूप में।

साथ ही, अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि पुलिस ने पर्याप्त आधार के बिना ही FIR दर्ज कर ली।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है और वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों के फरार होने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई आशंका नहीं है।

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वहीं, राज्य की ओर से पेश वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और आगे और साक्ष्य मिल सकते हैं।

अदालत ने बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया।

कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी वसीम खान और यूसुफ मेहफूज को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर रिहा किया जाए।

साथ ही, उन्हें ट्रायल कोर्ट में निर्धारित तिथियों पर उपस्थित रहने और BNSS की धारा 480(3) का पालन करने के निर्देश दिए गए।

Case Details:

Case Title: Wasim Khan and Others vs State of Madhya Pradesh

Case Number: MCRC No. 13867 of 2026

Judge: Justice Ramkumar Choubey

Decision Date: April 9, 2026

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