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सुप्रीम कोर्ट ने नए घृणास्पद भाषण कानूनों को बनाने से इनकार कर दिया, कहा संसद को इस पर फैसला लेना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए और उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के खुलासे पर जोर दिया। - अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ और अन्य।

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट ने नए घृणास्पद भाषण कानूनों को बनाने से इनकार कर दिया, कहा संसद को इस पर फैसला लेना होगा।

नई दिल्ली की अदालत में एक लंबे समय से लंबित जनहित याचिकाओं के समूह पर सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर अहम निर्देश जारी किए। यह फैसला कई याचिकाओं को साथ लेकर दिया गया, जिनमें चुनाव सुधार और उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के खुलासे की मांग उठाई गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई थी। समय के साथ, इस विषय पर कई अन्य याचिकाएं भी जुड़ती गईं।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे व्यक्तियों का चुनाव लड़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख पर असर डालता है। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि ऐसे उम्मीदवारों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।

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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अगुवाई वाली पीठ ने इस मुद्दे की गंभीरता को स्वीकार किया। अदालत ने माना कि राजनीति में अपराधीकरण एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

पीठ ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध हो।

अदालत ने कहा,

“मतदाताओं को सूचित निर्णय लेने का अधिकार है, और इसके लिए उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों का खुलासा जरूरी है।”

साथ ही, अदालत ने यह भी दोहराया कि कानून बनाना संसद का अधिकार क्षेत्र है और न्यायालय इस सीमा का सम्मान करता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में पीठ ने कहा,

“अदालत नीतिगत निर्णय नहीं ले सकती, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश दे सकती है।”

इस मामले में अदालत ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया:

  • क्या आपराधिक मामलों का सामना कर रहे उम्मीदवारों पर सीधे प्रतिबंध लगाया जा सकता है
  • मतदाताओं को जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है
  • चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की भूमिका

अदालत ने यह भी देखा कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन किस हद तक हो रहा है और क्या सुधार की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देते हुए कई निर्देश दिए।

पीठ ने कहा कि राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यह जानकारी न केवल चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए, बल्कि जनता तक भी प्रभावी तरीके से पहुंचाई जानी चाहिए।

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अदालत ने यह भी कहा कि उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित मामलों का विवरण आसानी से समझ में आने वाली भाषा में प्रकाशित किया जाए, ताकि आम मतदाता भी उसे समझ सके।

अदालत ने चुनाव आयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उसे अपने दिशा-निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करना चाहिए।

साथ ही, राजनीतिक दलों को भी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

पीठ ने कहा,

“राजनीतिक दल लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनसे उच्च स्तर की जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।”

अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निस्तारण करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए निर्देश जारी किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह कानून बनाने के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश दे सकती है।

इन निर्देशों के साथ, अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया।

Case Details

Case Title: Ashwini Kumar Upadhyay v. Union of India & Ors.

Case Number: W.P.(C) No. 943 of 2021 & connected matters

Judge: Justice Vikram Nath and Sandeep Metha

Decision Date: APRIL 29, 2026

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