मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक अहम पारिवारिक विवाद में फैसला सुनाते हुए नाबालिग बच्ची की अभिभावकता को लेकर दायर अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे का हित सर्वोपरि होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला C.M.A(MD)No.423 of 2026 का है, जिसमें अपीलकर्ता एस. बालाजी ने परिवार न्यायालय, मदुरै के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
अपीलकर्ता का कहना था कि वह और उनकी पत्नी संतानहीन थे और उन्होंने पड़ोस में रहने वाली महिला (प्रतिवादी) के साथ आपसी समझ के आधार पर उसकी तीसरी बच्ची को गोद लेने का निर्णय लिया था।
बताया गया कि बच्ची का जन्म दिसंबर 2023 में हुआ था और दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से परिचय था। इसी आधार पर अपीलकर्ता ने खुद को बच्ची का कानूनी अभिभावक घोषित करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की पीठ ने पूरे मामले की सुनवाई के दौरान अभिभावकता कानून के सिद्धांतों पर जोर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आपसी सहमति या व्यक्तिगत संबंध के आधार पर किसी बच्चे की अभिभावकता नहीं सौंपी जा सकती, खासकर जब वैधानिक प्रक्रिया का पालन न किया गया हो।
पीठ ने कहा,
“बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है और किसी भी निर्णय में यही मुख्य कसौटी होनी चाहिए।”
अदालत ने यह भी देखा कि गोद लेने या अभिभावक नियुक्त करने की प्रक्रिया कानून के तहत निर्धारित है, और उसका सख्ती से पालन जरूरी है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि बच्ची अपनी जैविक मां के साथ रह रही है और उसके हितों के खिलाफ कोई ठोस आधार पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि उसे अलग करना जरूरी है।
मामले में "अभिभावक और वार्ड अधिनियम, 1890" के मालिक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अदालत ने कहा कि इस अधिनियम के तहत अभिभावक की नियुक्ति के लिए कई सिद्धांतों पर विचार किया गया है - जैसे कि बच्चा नैतिकता, उसकी सुरक्षा और स्थिरता।
पीठ ने यह भी कहा कि किसी बच्चे को उसके प्राकृतिक अभिभावक से अलग करना एक गंभीर कदम है और इसके लिए मजबूत कानूनी आधार होना चाहिए।
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अदालत ने परिवार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और अपील को खारिज कर दिया।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि बच्ची के हित में उसे वर्तमान अभिभावक से अलग किया जाना चाहिए।
इस तरह, परिवार न्यायालय का आदेश बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया।
Case Details
Case Title: S. Balaji vs. M.A. Mahaboobani
Case Number: C.M.A(MD) No. 423 of 2026
Judges: Justice N. Anand Venkatesh and Justice K.K. Ramakrishnan
Decision Date: 28 April 2026











