गौहाटी हाई कोर्ट ने एक अहम आपराधिक अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले में आंशिक बदलाव करते हुए मुख्य आरोपी की सजा को कम कर दिया है। अदालत ने हत्या (Section 302 IPC) के तहत दी गई सजा को बदलकर गैर-इरादतन हत्या (Section 304 Part-I IPC) में परिवर्तित किया और सजा घटाकर 10 साल कर दी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला सेशन केस नंबर 105/2023 से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी फजर अली को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं, छह अन्य सह-आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
इस फैसले के खिलाफ दो अलग-अलग अपीलें दायर की गईं-
- एक अपील में फजर अली ने अपनी सजा को चुनौती दी
- दूसरी अपील में शिकायतकर्ता ने सह-आरोपियों के बरी होने को चुनौती दी
दोनों अपीलों पर हाई कोर्ट ने एक साथ सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयानों और सबूतों का विस्तार से विश्लेषण किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट गवाहों की विश्वसनीयता का आकलन करने के लिए सबसे उपयुक्त मंच होता है।
पीठ ने कहा,
“गवाहों के आकलन के लिए कोई तय फार्मूला नहीं हो सकता, और सच्चाई तक पहुंचने की प्रक्रिया को ट्रायल जज बेहतर तरीके से देख सकता है।”
अदालत ने यह भी पाया कि सह-आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने मृतक पर हमला किया था।
कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
अदालत ने साफ कहा कि,
“रिकॉर्ड में ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है जो सह-आरोपियों की संलिप्तता को साबित करता हो।”
इसलिए, उनकी बरी को बरकरार रखा गया।
मुख्य आरोपी फजर अली के मामले में अदालत ने माना कि घटना के तथ्यों से अदालत ने पाया कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और इरादतन हत्या साबित नहीं होती।
कोर्ट ने कहा कि Section 302 IPC (हत्या) लागू नहीं होता, बल्कि यह मामला Section 304 Part-I IPC (गैर-इरादतन हत्या) के तहत आता है।
Case Details
Case Title: Abul Basfar vs State of Assam & Ors.
Case Number: Crl. A. 247/2025 & Crl. A. 30/2024
Judge: Justice Michael Zothankhuma & Justice Kaushik Goswami
Decision Date: 20 April 2026











