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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की, कहा- दुर्घटना के समय वाहन बीमित था; ट्रिब्यूनल का मुआवजा आदेश बरकरार

Shivam Y.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की, कहा- दुर्घटना के समय वाहन बीमित था; ट्रिब्यूनल का मुआवजा आदेश बरकरार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक पुराने सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले में बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में असफल रही कि दुर्घटना के समय वाहन बीमित नहीं था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 1996 में हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें घायल व्यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), मुंबई ने 19 अक्टूबर 2011 को ₹74,422 का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

बीमा कंपनी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि दुर्घटना के समय बीमा पॉलिसी समाप्त हो चुकी थी, इसलिए उस पर कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।

हालांकि, यह अपील लगभग 15 साल बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई, जिस पर अदालत ने भी टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति जस्टिस जितेंद्र जैन ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने सभी साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया था।

अदालत ने कहा,

“ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट रूप से पाया है कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि वाहन बीमित नहीं था, बल्कि रिकॉर्ड से यह संकेत मिलता है कि वाहन वैध रूप से बीमित था।”

कोर्ट ने यह भी माना कि बीमा कंपनी द्वारा पेश किए गए तर्क और दस्तावेज ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों को गलत साबित नहीं करते।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मुआवजा मामलों में देरी को लेकर गंभीर चिंता जताई।

कोर्ट ने कहा,

“दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा पाने में वर्षों लग जाते हैं, जिससे मुआवजा देने का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होता है।”

अदालत ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देशभर में लाखों मामले लंबित हैं और बड़ी संख्या में अपीलें हाईकोर्ट में वर्षों तक लंबित रहती हैं।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि मोटर दुर्घटना मामलों के लिए अलग अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने पर विचार किया जाना चाहिए, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।

अदालत ने ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के निष्कर्ष तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित हैं और उनमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।

इसके साथ ही संबंधित सभी सिविल आवेदन भी निरस्त कर दिए गए।

Case Details

Case Title: The Oriental Insurance Co. Ltd. vs. Sandeep Sunder Kolhe & Ors.

Case Number: First Appeal (ST.) No. 35338 of 2012

Judge: Justice Jitendra Jain

Decision Date: April 22, 2026

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