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सहमति में छेड़छाड़ का कोई सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने सर्जन के खिलाफ आपराधिक मामला समाप्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक केस रद्द किया, कहा सर्जरी उचित थी और सहमति रिकॉर्ड में मौजूद, मुकदमा जारी रखना न्याय का दुरुपयोग। - डॉ. एस. बालगोपाल बनाम तमिलनाडु राज्य और अन्य

Vivek G.
सहमति में छेड़छाड़ का कोई सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने सर्जन के खिलाफ आपराधिक मामला समाप्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक सर्जन के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। मामला एक छोटे बच्चे की सर्जरी से जुड़ा था, जिसमें अभिभावक की सहमति (consent) को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब चिकित्सा प्रक्रिया उचित हो और रिकॉर्ड में सहमति मौजूद हो, तो आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्याय का दुरुपयोग हो सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला डॉ. एस. बालगोपाल से जुड़ा है, जिन्होंने एक डेढ़ साल के बच्चे की सर्जरी की थी। बच्चे को “अंडकोष का नीचे न उतरना” (undescended testis) की समस्या थी।

परिजन का आरोप था कि उन्होंने केवल Orchidopexy (अंडकोष को सही स्थान पर लाना) के लिए सहमति दी थी, लेकिन डॉक्टर ने Orchidectomy (अंडकोष निकालना) कर दिया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि सहमति पत्र में बाद में बदलाव (interpolation) किया गया।

इसी आधार पर IPC की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई और मामला ट्रायल कोर्ट तक पहुंचा।

मद्रास हाई कोर्ट ने डॉक्टर की याचिका खारिज कर दी थी और ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया था। इसके बाद डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट के सामने एक महत्वपूर्ण तथ्य मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट रही।

रिपोर्ट में कहा गया:

“इस प्रकार की स्थिति में Orchidectomy एक उपयुक्त चिकित्सा प्रक्रिया हो सकती है, विशेषकर जब प्रभावित अंडकोष छोटा और असामान्य हो।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऐसी प्रक्रिया अभिभावक की सहमति से की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि:

  • डॉक्टर की योग्यता या सर्जरी की आवश्यकता पर कोई सवाल नहीं था
  • मेडिकल बोर्ड ने प्रक्रिया को उचित बताया
  • सहमति पत्र में दोनों प्रक्रियाएं (Orchidopexy/Orchidectomy) दर्ज थीं

अदालत ने कहा:

“रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सहमति पत्र में बाद में बदलाव किया गया।”

साथ ही कोर्ट ने यह भी दोहराया कि:

“चिकित्सकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई तभी होनी चाहिए जब स्पष्ट लापरवाही या असामान्य व्यवहार साबित हो।”

मामले का मुख्य विवाद यही था कि क्या अभिभावक ने Orchidectomy के लिए सहमति दी थी या नहीं।

अदालत ने पाया कि:

  • सहमति पत्र पहले से मौजूद था
  • उसमें दोनों विकल्प लिखे थे
  • किसी तरह की छेड़छाड़ का कोई फॉरेंसिक प्रमाण नहीं था

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” होगा।

अंत में अदालत ने आदेश दिया:

“आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जाता है।”

इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट में लंबित पूरा मामला समाप्त कर दिया गया

Case Details

Case Title: Dr. S. Balagopal vs State of Tamil Nadu & Another

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 14803 of 2023 (2026 INSC 319)

Judges: Justice Manoj Misra and Justice P.S. Narasimha

Decision Date: April 6, 2026

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