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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: योग्यता सूची से रिक्त सरकारी पदों पर स्वतः नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चयन सूची में अगला उम्मीदवार होने मात्र से नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता, भले ही चयनित व्यक्ति जॉइन न करे। - कर्नाटक राज्य एवं अन्य बनाम संतोष कुमार सी

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: योग्यता सूची से रिक्त सरकारी पदों पर स्वतः नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केवल चयन सूची (select list) में नीचे होना किसी उम्मीदवार को स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि यदि चयनित उम्मीदवार जॉइन नहीं करता, तो भी अगले उम्मीदवार को सीधे नियुक्ति का दावा नहीं मिल सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कर्नाटक राज्य द्वारा दायर अपील से जुड़ा था। एक पूर्व सैनिक उम्मीदवार ने दावा किया था कि चयनित उम्मीदवार के जॉइन न करने पर खाली पद उसे दिया जाना चाहिए।

रिकॉर्ड के अनुसार, 2011 की भर्ती प्रक्रिया के तहत कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) ने विभिन्न ग्रुप A और B पदों के लिए चयन किया। एक चयनित उम्मीदवार ने न तो मेडिकल प्रक्रिया पूरी की और न ही ड्यूटी जॉइन की।

इसके बाद, याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए दावा किया कि वह सूची में अगले स्थान पर है और उसे उस पद पर नियुक्त किया जाए।

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प्रशासनिक अधिकरण (Tribunal) ने इस मांग को खारिज कर दिया था। उसका कहना था कि नियमों में वेटिंग लिस्ट (waiting list) या अतिरिक्त सूची का कोई प्रावधान नहीं है।

हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस निर्णय को पलटते हुए कहा कि खाली पद को अगले योग्य उम्मीदवार को दिया जाना चाहिए और राज्य को याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि भर्ती नियमों का ढांचा बहुत महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने कहा:

“सिर्फ इस आधार पर कि चयनित उम्मीदवार ने जॉइन नहीं किया, नीचे के उम्मीदवार को स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता।”

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पीठ ने आगे कहा कि:

“सेलेक्ट लिस्ट कोई खुला स्रोत (open-ended source) नहीं है, जिसे अनिश्चित समय तक चलाया जा सके।”

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि चयन सूची में नाम आना केवल पात्रता देता है, नियुक्ति का अधिकार नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक भर्ती नियम, 1997 का विस्तृत अध्ययन किया।

कोर्ट के अनुसार:

  • चयन सूची केवल विज्ञापित पदों तक सीमित होती है
  • नियमों में वेटिंग लिस्ट या अतिरिक्त सूची का कोई प्रावधान नहीं है
  • नियुक्ति केवल नियमों के तहत ही हो सकती है

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पीठ ने यह भी कहा कि यदि कोई पद खाली रह जाता है, तो उसे नई भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाना चाहिए, न कि पुरानी सूची से।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और ट्रिब्यूनल के निर्णय को सही ठहराया।

“हाई कोर्ट का आदेश नियमों के अनुरूप नहीं था और इसे बनाए नहीं रखा जा सकता।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को उस पद पर नियुक्ति का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था।

अंततः, कोर्ट ने राज्य की अपील स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और याचिका खारिज कर दी।

Case Details

Case Title: State of Karnataka & Ors. vs Santhosh Kumar C

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 35896 of 2025

Judges: Justice Vikram Nath, Justice Sandeep Mehta

Decision Date: March 23, 2026

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