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बलात्कार में सहायता करने पर 10 साल की जेल: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बार-बार अपराध करने पर चिंता जताई

दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर अपराध में आरोपी महिला को 10 साल की सजा सुनाई और कहा कि न्यूनतम सजा से कम देना कानून के खिलाफ है। - राज्य (दिल्ली राजधानी) बनाम स्वीटी

Shivam Y.
बलात्कार में सहायता करने पर 10 साल की जेल: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बार-बार अपराध करने पर चिंता जताई

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक संवेदनशील आपराधिक मामले में सजा तय करते हुए स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में न्यूनतम सजा से कम देना संभव नहीं है। अदालत ने आरोपी महिला की भूमिका को “सक्रिय और सुनियोजित” बताते हुए कठोर सजा सुनाई।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 31 अगस्त 2013 की घटना से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपराध की स्थिति में लाया गया। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद राज्य (दिल्ली सरकार) ने अपील दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि वह लंबे समय तक ट्रायल का सामना कर चुकी है और लगभग 9 महीने जेल में रह चुकी है। साथ ही, उसके छोटे बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

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न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की एकल पीठ ने मामले के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार किया। अदालत ने साफ कहा कि जहां कानून न्यूनतम सजा तय करता है, वहां अदालत उससे कम सजा नहीं दे सकती।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा:

“न्यूनतम सजा के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए और सहानुभूति के आधार पर उसे कम नहीं किया जा सकता।”

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पीठ ने आरोपी की भूमिका पर विशेष टिप्पणी करते हुए कहा कि उसने पीड़िता को बहकाने, अपराध को अंजाम दिलाने और बाद में धमकाने में सक्रिय भागीदारी निभाई।

अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी अन्य आपराधिक मामलों में भी शामिल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि लगातार आपराधिक व्यवहार का हिस्सा है।

अदालत ने कहा कि सजा का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि समाज में संदेश देना भी है।

पीठ ने कहा:

“सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए और इसे केवल पैसे या सहानुभूति से कम नहीं किया जा सकता।”

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अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित सजा सुनाई:

सभी सजाएं एक साथ (concurrently) चलेंगी।

इसके अलावा, अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने में से ₹50,000 पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएं। साथ ही, दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को अतिरिक्त मुआवजा तय करने की सिफारिश भी की गई।

Case Details

Case Title: State (NCT of Delhi) vs Sweety

Case Number: CRL.A. 1078/2018

Court: High Court of Delhi at New Delhi

Judge: Hon’ble Ms. Justice Chandrasekharan Sudha

Decision Date: 25 March 2026

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