दिल्ली में हुई सुनवाई के दौरान भारत का सर्वोच्च न्यायालयने एक अहम फैसले में साफ किया कि जहां पहले से वास्तविक विवाद मौजूद हो, वहां दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) शुरू नहीं की जा सकती। अदालत ने NCLAT के आदेश को पलटते हुए NCLT का निर्णय बहाल कर दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला बनाम केमिकल सप्लायर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का है। रिस्पॉन्डेंट कंपनी ने दावा किया कि उसने केमिकल सप्लाई की और करीब ₹2.92 करोड़ बकाया हैं। इसके बाद दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन दिया गया।
अपीलकर्ता कंपनी ने इस दावे का विरोध किया और कहा कि सप्लाई किया गया माल खराब (defective) था, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ। कंपनी ने यह भी बताया कि उसने पहले ही इस संबंध में शिकायतें की थीं और अकाउंट मिलान (reconciliation) की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की बेंच ने रिकॉर्ड में मौजूद ईमेल, लेजर एंट्री और पुलिस शिकायतों का विस्तार से अध्ययन किया।
कोर्ट ने पाया कि:
- विवाद की शुरुआत डिमांड नोटिस से पहले ही हो चुकी थी
- दोनों पक्षों के बीच भुगतान और गुणवत्ता को लेकर असहमति थी
- अकाउंट्स को लेकर स्पष्टता नहीं थी
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बेंच ने कहा,
“रिकॉर्ड से साफ है कि पक्षों के बीच पहले से विवाद मौजूद था, जो केवल दिखावटी (illusory) नहीं बल्कि वास्तविक है।”
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि दिवालिया कानून का उद्देश्य केवल वसूली (recovery) नहीं है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर किसी मामले में यानी पहले से पूर्व-मौजूद विवाद मौजूद है, तो NCLT को दिवालिया प्रक्रिया की अनुमति नहीं देनी चाहिए। सिर्फ यह देखना जरूरी है कि विवाद वास्तविक है या नहीं-उसकी गहराई में जाकर निर्णय करना इस स्तर पर आवश्यक नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के 11 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द करते हुए NCLT के 16 दिसंबर 2022 के आदेश को बहाल कर दिया। इसके साथ ही, दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आवेदन खारिज कर दिया गया।
दोनों पक्षों को अपने-अपने खर्च खुद वहन करने के निर्देश दिए गए।
Case Details
Case Title: GLS Films Industries Pvt. Ltd. vs Chemical Suppliers India Pvt. Ltd.
Case Number: Civil Appeal No. 4019 of 2025
Judge: Justice Sanjay Kumar and Justice R. Mahadevan
Decision Date: 09 April 2026










