लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब मामला केवल एफआईआर और आपराधिक आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कोर्ट परिसर के आसपास हो रहे अवैध अतिक्रमण पर भी गंभीर सवाल उठे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका अनुराधा सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य का मामला अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका से उत्पन्न हुआ। याचिकाकर्ताओं - दो वकालत करने वाले अधिवक्ताओं - और एक परिवार के सदस्य - ने आरोप लगाया कि एफआईआर उनके निवास के पास अवैध गतिविधियों से जुड़े पूर्व विवादों के जवाब में दर्ज की गई थी।
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याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 30 अगस्त, 2025 की एक पूर्व घटना के संबंध में उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी और उसके बाद वर्तमान मामले के शिकायतकर्ता सहित कुछ व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि बाद वाली एफआईआर दर्ज कराने में देरी हुई और विशेष न्यायाधीश द्वारा आदेश दिए जाने से पहले उसका उचित सत्यापन नहीं किया गया था।
इससे पहले न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश देते हुए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी।
सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी (ACP, काकोरी) और शिकायतकर्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। जांच अधिकारी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि जांच विधि के अनुसार की जा रही है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
इसी बीच, लखनऊ नगर निगम की ओर से एक निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि संबंधित क्षेत्र में लगभग 72 अवैध अतिक्रमण पाए गए हैं, जिनमें अधिकांश अधिवक्ताओं द्वारा किए गए हैं।
अदालत ने इस पर स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि:
“सार्वजनिक स्थानों, फुटपाथ या सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामलों में तत्काल कार्रवाई की जा सकती है, और ऐसे मामलों में पूर्व सूचना देना अनिवार्य नहीं है।”
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कोर्ट ने यह भी कहा कि “rule of law” को प्रभावी बनाने के लिए ऐसे अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाना चाहिए।
नगर निगम ने बताया कि वह अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपनाएगा। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
- नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए
- आवश्यकता पड़ने पर पुलिस और जिला प्रशासन की मदद ली जाए
- यदि नोटिस प्राप्त नहीं होता है, तो उसे सार्वजनिक रूप से चस्पा किया जाए
- साथ ही, समाचार पत्रों में भी प्रकाशन किया जाए
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अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक इस संबंध में उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जाए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए स्पष्ट किया कि नगर निगम अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए त्वरित कानूनी कार्रवाई करे और अपनी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे।
Case Details
Case Title: Anuradha Singh and Others vs State of U.P. and Others
Case Number: Criminal Misc. Writ Petition No. 713 of 2026
Judges: Justice Rajesh Singh Chauhan, Justice Rajeev Bharti
Decision Date: March 11, 2026










