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शादीशुदा बेटी को नहीं मिला अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि शादीशुदा बेटी अनुकंपा नियुक्ति की पात्र नहीं है और यह लाभ केवल तत्काल आर्थिक संकट दूर करने के लिए है। - श्रीमती लक्ष्मी बनाम रजिस्ट्रार जनरल, कर्नाटक उच्च न्यायालय और अन्य।

Shivam Y.
शादीशुदा बेटी को नहीं मिला अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट, धारवाड़ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक सीमित राहत है। कोर्ट ने शादीशुदा बेटी की अपील को खारिज करते हुए कहा कि वह इस लाभ की पात्र नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला एक महिला अपीलकर्ता का था, जिनके पिता जिला न्यायालय में अटेंडर के पद पर कार्यरत थे और 21 जून 2005 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद अपीलकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

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हालांकि, संबंधित अधिकारियों ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वह शादीशुदा बेटी हैं और उस समय लागू नियमों के तहत उन्हें आश्रित (dependent) नहीं माना जा सकता।

बाद में अपीलकर्ता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कई बार याचिकाएं दाखिल कीं, लेकिन पहले के अस्वीकृति आदेश को उन्होंने समय पर चुनौती नहीं दी।

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपीलकर्ता ने 2007 में अपने आवेदन के खारिज होने की जानकारी होने के बावजूद उस आदेश को चुनौती नहीं दी और बाद में तथ्य छिपाकर याचिका दायर की।

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कोर्ट ने कहा,

“अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है, न कि इसे अधिकार या विरासत के रूप में देना।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि शादीशुदा बेटी, जो अपने पति के साथ रहती है, सामान्यतः अपने पिता पर निर्भर नहीं मानी जाती।

एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा,

“विवाहित बेटी को आम तौर पर पिता पर आश्रित नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की होती है।”

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कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अपीलकर्ता ने काफी समय बाद दोबारा आवेदन किया। इस देरी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बदल चुकी हो सकती है।

पीठ ने कहा,

“लंबे समय के बाद अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है, क्योंकि तत्काल राहत की जरूरत अब नहीं रहती।”

सभी तथ्यों और रिकॉर्ड को देखते हुए कोर्ट ने माना कि अपीलकर्ता न तो पात्रता मानदंड पूरा करती हैं और न ही उनके पास अनुकंपा नियुक्ति का कोई कानूनी अधिकार है।

अंततः, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया और सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा।

Case Title: Smt. Laxmi vs Registrar General, High Court of Karnataka & Ors.

Case Number: Writ Appeal No. 100548 of 2024

Judges: Justice B.M. Shyam Prasad & Justice Shivashankar Amarannavar

Decision Date: March 13, 2026

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