गुजरात हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि तकनीकी कारणों के आधार पर किसी नागरिक को चुनावी प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि नाम शामिल करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है, तो केवल औपचारिक प्रकाशन में देरी के कारण अधिकार नहीं छीना जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला जयेश बटुकभाई पटेल (वनानी) बनाम राज्य सरकार एवं अन्य से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता का नाम वर्ष 2021 में विधानसभा मतदाता सूची में शामिल था। बाद में निवास स्थान बदलने के कारण विशेष संशोधन प्रक्रिया के दौरान उनका नाम हटा दिया गया।
उन्होंने 8 फरवरी 2026 को पुनः नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया, जिसे 3 मार्च 2026 को संबंधित अधिकारी ने स्वीकार भी कर लिया।
Read Also:- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने धारा 33C(1) के तहत औपचारिक आवेदन के बिना विलंब माफी को बरकरार रखा।
हालांकि, 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित सूची में उनका नाम नहीं था, क्योंकि उस समय तक उनका आवेदन लंबित था। इसी आधार पर नगर निकाय की प्रारंभिक मतदाता सूची (23 मार्च 2026) में भी उनका नाम शामिल नहीं किया गया।
जब याचिकाकर्ता ने अपने नाम को शामिल करने की मांग की, तो अधिकारियों ने नियम 6(4) का हवाला देते हुए मना कर दिया। उनका तर्क था कि नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि जब नाम शामिल करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है, तो केवल अंतिम सूची के प्रकाशन में देरी के कारण उन्हें चुनाव से वंचित नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि,
“एक बार जब किसी व्यक्ति का नाम शामिल करने का आदेश दे दिया गया है, तो तकनीकी आधार पर उसके चुनावी अधिकार को नकारा नहीं जा सकता।”
Read Also:- PWD-LV आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मेरिट को दी प्राथमिकता, हाईकोर्ट का आदेश पलटा
अदालत ने यह भी माना कि प्रारंभिक सूची का आधार भले ही पुरानी सूची हो, लेकिन जब उससे पहले ही नाम शामिल करने का आदेश पारित हो चुका था, तो उस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
“मतदान और चुनाव में भाग लेना एक नागरिक का महत्वपूर्ण अधिकार है, जिसे केवल प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण रोका नहीं जा सकता।”
राज्य चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार चलती है और अंतिम समय में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस मामले में पहले से पारित आदेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अदालत ने 4 अप्रैल 2026 के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को आगामी चुनाव (26 अप्रैल 2026) में भाग लेने की अनुमति दी जाए।
साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि यह निर्णय मामले के विशेष तथ्यों के आधार पर दिया गया है और इसे सामान्य नियम के रूप में नहीं माना जाएगा।
case Details
Case Title: Jayesh Batukbhai Patel (Vanani) vs State of Gujarat & Ors.
Case Number: R/Special Civil Application No. 5056 of 2026
Judges: Justice N.S. Sanjay Gowda & Justice J. L. Odedra
Decision Date: April 7, 2026










