सुप्रीम कोर्ट ने आर्बिट्रेशन कानून से जुड़े एक अहम विवाद में स्पष्ट किया है कि एक बार पक्षकारों ने आर्बिट्रेशन की “सीट” तय कर दी, तो केवल सुविधा के लिए सुनवाई किसी दूसरे शहर में होने से अधिकार क्षेत्र नहीं बदलता। अदालत ने कहा कि इस मामले में श्रीनगर ही आर्बिट्रेशन की सीट थी, इसलिए वहीं की अदालत को मामला सुनने का अधिकार है।
मामले की पृष्ठभूमि
जम्मू-कश्मीर लिंकनस्ट्रक्शन एजेंसी ने रैश बिल्डर्स इंडिया प्रा. लिमिटेड को इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिकल्स के लिए नीचे दिए गए निर्देश दिए गए। बाद में भुगतान और अनुबंध संबंधी विवाद सामने आए, जिसके बाद मामला आर्बिट्रेशन में गया।
पहले हाई कोर्ट ने एक मध्यस्थ नियुक्त किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस.एस. निज्जर को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया। 26 मार्च 2016 के आदेश में पक्षकारों की सहमति से श्रीनगर को आर्बिट्रेशन की सीट और नई दिल्ली को वेन्यू तय किया गया।
बाद में अंतिम आर्बिट्रेशन अवॉर्ड 15 जनवरी 2024 को नई दिल्ली में दिया गया।
एजेंसी ने अवॉर्ड को चुनौती देते हुए जम्मू-कश्मीर कानून के तहत Section 34 याचिका दायर की। लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका लौटा दी कि अवॉर्ड नई दिल्ली में दिया गया था, इसलिए दिल्ली की अदालतों का अधिकार क्षेत्र बनता है।
इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
पीठ ने कहा,
“आर्बिट्रेशन की सीट पक्षकारों की सहमति से तय होती है, किसी अवॉर्ड में लिखे गए स्थान से नहीं।”
अदालत ने माना कि सुनवाई नई दिल्ली में होना या अवॉर्ड वहां साइन होना केवल सुविधा का मामला था। इससे कानूनी सीट नहीं बदलती।
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पीठ ने यह भी कहा,
“यदि ऐसी दलील स्वीकार कर ली जाए तो सीट की अवधारणा ही समाप्त हो जाएगी और अधिकार क्षेत्र को लेकर अनिश्चितता पैदा होगी।”
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का 8 जुलाई 2024 का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि श्रीनगर ही आर्बिट्रेशन की सीट है, इसलिए वहीं की अदालत को Section 34 याचिका सुनने का अधिकार है।
कोर्ट ने कार्यवाही बहाल करते हुए निर्देश दिया कि मामला मेरिट पर शीघ्रता से तय किया जाए। अपील स्वीकार कर ली गई और लागत पर कोई आदेश नहीं दिया गया।
Case Details
Case Title: J&K Economic Reconstruction Agency v. Rash Builders India Private Limited
Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) Diary No. 44792 of 2025
Judge: Justice Pamidighantam Sri Narasimha and Justice Alok Aradhe
Decision Date: April 15, 2026










