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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा मद्रास हाईकोर्ट का फैसला, पारिवारिक संपत्ति विवाद का मुकदमा फिर ट्रायल कोर्ट भेजा गया

सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक संपत्ति विवाद में मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला बहाल किया और मुकदमा जारी रखने का रास्ता साफ किया। - एस. वल्लियामई और अन्य बनाम एस. रामनाथन और अन्य

Rajan Prajapati
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा मद्रास हाईकोर्ट का फैसला, पारिवारिक संपत्ति विवाद का मुकदमा फिर ट्रायल कोर्ट भेजा गया

सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबे समय से चल रहे पारिवारिक संपत्ति विवाद में अहम राहत देते हुए मद्रास हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक अवस्था में तथ्यों का ऐसा मूल्यांकन किया, जैसा कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान किया जाना चाहिए था।

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा बहाल किए गए मुकदमे को फिर से जारी रखने की अनुमति दे दी।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद एक परिवार की संपत्तियों और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़ा था। परिवार के भीतर मौखिक बंटवारे, संपत्ति हस्तांतरण और बाद में दायर दो अलग-अलग दीवानी मुकदमों को लेकर विवाद सामने आया।

पहला मुकदमा वर्ष 2012 में दायर किया गया था। इसके बाद वर्ष 2013 में दूसरा मुकदमा दायर हुआ, जिसमें पावर ऑफ अटॉर्नी को चुनौती दी गई।

प्रतिवादियों ने दूसरे मुकदमे को खारिज करने की मांग की थी। उनका कहना था कि दूसरा मुकदमा पहले मामले से जुड़ा है और कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

चेन्नई की ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादियों की याचिका खारिज कर दी थी और वादियों को अंतरिम राहत भी दी थी।

इसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर हुई। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटते हुए दूसरा मुकदमा ही खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने माना था कि दोनों मुकदमों का कारण एक ही है और दूसरा मुकदमा अलग से नहीं चल सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के दृष्टिकोण पर असहमति जताई। पीठ ने कहा कि मुकदमे की शुरुआती अवस्था में केवल वादपत्र (plaint) के आधार पर सीमित परीक्षण होना चाहिए, न कि साक्ष्यों जैसा विस्तृत विश्लेषण।

पीठ ने कहा,

“हाईकोर्ट ने दूसरे मुकदमे के कथनों का परीक्षण ऐसे किया मानो वह साक्ष्य हों, जो उचित नहीं था।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दो मुकदमों के कारण, राहतें और पक्षकार अलग हों, तो केवल प्रारंभिक स्तर पर मुकदमा खारिज नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए मद्रास हाईकोर्ट का 11 जुलाई 2019 का आदेश रद्द कर दिया।

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश और मुकदमे की बहाली कायम रखी। साथ ही कहा कि इस फैसले की टिप्पणियां केवल अपील निपटाने तक सीमित हैं और ट्रायल कोर्ट मामले का निर्णय स्वतंत्र रूप से करेगा।

पक्षकारों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए गए।

Case Details

Case Title: S. Valliammai & Others v. S. Ramanathan & Another

Case Number: Civil Appeal No. 3624 of 2024

Judge: Justice B.V. Nagarathna and Justice Ujjal Bhuyan

Decision Date: April 16, 2026

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