बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने एक अहम फैसले में पुसद नगर परिषद के खिलाफ जारी भविष्य निधि (PF) वसूली आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के ऐसी कार्रवाई कानून के खिलाफ है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कर्मचारियों के PF बकाया से जुड़ा है, जिसमें प्राधिकरण ने नगर परिषद पर वर्ष 2011 से 2016 तक के लिए लगभग ₹8.52 करोड़ की देनदारी तय की थी।
नगर परिषद ने इस आदेश को चुनौती देते हुए ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल की थी। हालांकि, अक्टूबर 2025 में यह अपील अनुपस्थिति के कारण खारिज हो गई। इसके बाद प्राधिकरण ने दिसंबर 2025 में वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी और नगर परिषद के खातों से ₹3.65 करोड़ से अधिक राशि निकाल ली गई।
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न्यायमूर्ति प्रफुल्ला एस. खुबालकर ने कहा कि 8 दिसंबर 2025 का वसूली आदेश बिना किसी ताजा और उचित नोटिस के पारित किया गया।
अदालत ने कहा,
“बिना पूर्व सूचना और सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार का आदेश पारित करना न्यायसंगत नहीं है।”
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि आठ साल पुराने नोटिस के आधार पर इतनी कड़ी कार्रवाई करना उचित नहीं ठहराया जा सकता। बैंक खातों को फ्रीज करना और बड़ी राशि वसूलना, वह भी बिना प्रक्रिया का पालन किए, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
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साथ ही, अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि जब 2017 का वसूली आदेश पहले से ही चुनौती के तहत था, तो नया आदेश क्यों जारी किया गया।
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 8 दिसंबर 2025 के वसूली आदेश को रद्द और निरस्त कर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि PF देनदारी से जुड़ा मूल विवाद ट्रिब्यूनल में लंबित अपील में तय होगा। नगर परिषद को अपनी अपील की बहाली के लिए ट्रिब्यूनल के समक्ष कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।
Case Title: Municipal Council, Pusad vs Assistant Provident Fund Commissioner & Ors.
Case Number: Writ Petition No. 7975 of 2025
Judge: Justice Prafulla S. Khubalkar
Decision Date: March 5, 2026










