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बार एसोसिएशनों: एकाधिक सदस्यता होने के बावजूद वकील को एक वोट का अधिकार है, कलकत्ता उच्च न्यायालय

कोलकाता हाई कोर्ट ने बार काउंसिल चुनाव में डुप्लीकेट वोटरों की शिकायत पर हस्तक्षेप करते हुए अंतिम मतदाता सूची में सुधार और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का आदेश दिया। - गौतम दास बनाम उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति और अन्य।

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बार एसोसिएशनों: एकाधिक सदस्यता होने के बावजूद वकील को एक वोट का अधिकार है, कलकत्ता उच्च न्यायालय

कोलकाता हाई कोर्ट की जलपाईगुड़ी बेंच ने बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल के चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में हस्तक्षेप करते हुए साफ कहा कि एक मतदाता एक से अधिक वोट नहीं डाल सकता। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखने के लिए अंतिम वोटर सूची में सुधार का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका गौतम दास बनाम हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी (WPA 334/2026) के रूप में दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जलपाईगुड़ी बार एसोसिएशन की अंतिम मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएँ हैं।

याचिका में कहा गया कि कई वकीलों के नाम एक से अधिक बार सूची में शामिल हैं, और कुछ ऐसे नाम भी हैं जो अन्य जिलों की बार एसोसिएशन से जुड़े होने के बावजूद यहाँ मतदाता के रूप में दर्ज हैं।

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न्यायमूर्ति शम्पा दत्त (पॉल) की पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि है।

अदालत ने कहा,

“एक वकील एक ही बार वोट देने का हकदार है, भले ही वह कई बार एसोसिएशन का सदस्य क्यों न हो।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि:

  • कुछ नाम एक से अधिक सूचियों में मौजूद हैं
  • डुप्लीकेट प्रविष्टियों को स्वीकार किया गया है
  • यह स्थिति “फ्री और फेयर चुनाव” के सिद्धांत के खिलाफ है

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अदालत ने टिप्पणी की,

“इस तरह की त्रुटि चुनाव नियमों के खिलाफ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है, यदि निष्पक्षता पर असर पड़ रहा हो।

पीठ ने कहा,

“जहां निष्पक्ष चुनाव पर असर पड़ता है, वहां अदालत का हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है।”

साथ ही, कोर्ट ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि वोटरों के नाम हटाने के लिए उनकी सहमति जरूरी है। इसे अदालत ने “स्पष्ट अनियमितता” बताया।

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अंत में, हाई कोर्ट ने निम्न निर्देश दिए:

  • अंतिम मतदाता सूची में तुरंत सुधार किया जाए
  • यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी मतदाता एक से अधिक बार वोट न डाल सके
  • पूरी प्रक्रिया 6 मार्च 2026 तक पूरी कर संशोधित सूची प्रकाशित की जाए

कोर्ट ने आदेश दिया,

“प्रतिवादी तुरंत कदम उठाएं ताकि कोई भी मतदाता एक से अधिक वोट न डाल सके और सभी त्रुटियों को ठीक किया जाए।”

Case Details

Case Title: Gautam Das vs. High Powered Election Committee & Ors.

Case Number: WPA 334 of 2026

Judge: Justice Shampa Dutt (Paul)

Decision Date: 02 March 2026

Counsels:

  • Petitioner: Mr. Soumya Majumder (Sr. Adv.) & team
  • Respondents: Mr. Bijoy Bikram Das, Mr. Sagar Bandyopadhyay

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