दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए GNCTD को स्पष्ट निर्देश दिया है कि शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान समिति का गठन तीन हफ्तों के भीतर पूरा किया जाए। अदालत ने कार्यवाही के दौरान प्रशासनिक ढिलाई पर असंतोष जताया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला महेश कुमार यादव द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि पहले दिए गए न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। सरकार की ओर से वकीलों ने स्थिति रिपोर्ट पेश की, जिसमें समिति गठन की प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई थी।
पहले बताया गया था कि राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद अधिसूचना जारी की जाएगी, लेकिन समय बीतने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस सचिन दत्ता की एकल पीठ ने कहा कि यह “दुर्भाग्यपूर्ण” है कि इतनी लंबी अवधि के बावजूद समिति का गठन नहीं हो पाया।
अदालत ने टिप्पणी की,
“सरकार की कार्यप्रणाली धीमी और अप्रभावी प्रतीत होती है।”
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साथ ही यह भी सामने आया कि प्रस्ताव, जो सितंबर 2025 में शुरू हुआ था, मार्च 2026 में मंत्री कार्यालय से वापस लौटा और फिर संशोधित कर दोबारा भेजा गया।
सरकार के संयुक्त सचिव ने वर्चुअल माध्यम से बताया कि संशोधित प्रस्ताव 25 मार्च 2026 को दोबारा भेजा गया है और आवश्यक आपत्तियों को दूर किया गया है।
अदालत ने उम्मीद जताई कि अब इस प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और आगे कोई अनावश्यक देरी नहीं होगी।
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अदालत ने निर्देश दिया कि शिकायत निवारण एवं विवाद समाधान समिति का गठन तीन सप्ताह के भीतर किया जाए।
साथ ही यह चेतावनी दी गई कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो शहरी विकास विभाग के सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को तय की गई है।
Case Details:
Case Title: Mahesh Kumar Yadav vs Manish Kumar Gupta & Anr.
Case Number: CONT.CAS(C) 1126/2024
Judge: Justice Sachin Datta
Decision Date: April 7, 2026










