जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दहेज उत्पीड़न और आपराधिक धमकी से जुड़े मामले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना ठोस और विशिष्ट आरोपों के केवल सामान्य शिकायत के आधार पर पूरे परिवार को अभियोजन का सामना नहीं कराया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मेला राम और अन्य बनाम जम्मू-कश्मीर राज्य और अन्य तथा संबंधित याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने FIR, चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिनमें उन्हें धारा 498-A और 506 RPC के तहत आरोपी बनाया गया था।
शिकायतकर्ता, जो पुलिस विभाग में कार्यरत थीं, ने आरोप लगाया था कि विवाह के कुछ महीनों बाद ही उन्हें पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। साथ ही, दहेज की मांग और पति के कथित संबंधों को लेकर भी आरोप लगाए गए।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह शिकायत पहले से चल रहे वैवाहिक विवाद और पति द्वारा दायर याचिकाओं का “काउंटर ब्लास्ट” है।
न्यायमूर्ति शाहजाद अज़ीम की पीठ ने रिकॉर्ड और गवाहों के बयान का अवलोकन करते हुए पाया कि आरोप अत्यंत सामान्य और अस्पष्ट हैं।
अदालत ने कहा,
“शिकायत में किसी भी घटना का समय, स्थान या तरीका स्पष्ट नहीं किया गया है… केवल सामान्य आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती।”
पीठ ने यह भी दोहराया कि हाल के वर्षों में धारा 498-A का दुरुपयोग बढ़ा है और इस तरह के मामलों में अदालतों को सतर्क रहना चाहिए।
विशेष रूप से, एक सह-आरोपी (आरोपित महिला) के संबंध में अदालत ने कहा कि वह न तो पति की रिश्तेदार है और न ही वैवाहिक घर में रहती थी, इसलिए उसके खिलाफ मामला बनता ही नहीं है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि “रिश्तेदार” की परिभाषा केवल रक्त, विवाह या गोद लेने से तय होती है, न कि किसी कथित व्यक्तिगत संबंध से।
अदालत ने पाया कि:
- आरोप “ओम्निबस” यानी सामान्य और बिना विवरण के हैं
- किसी विशिष्ट घटना का उल्लेख नहीं किया गया
- पति द्वारा पहले दायर मामलों के बाद यह शिकायत दर्ज हुई
- मामला व्यक्तिगत विवाद के चलते प्रतिशोध की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है
पीठ ने कहा,
“ऐसी कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसे जारी रखना न्याय के हित में नहीं होगा।”
उच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं को स्वीकार करते हुए FIR, चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा, इसलिए इसे समाप्त किया जाना उचित है।
Case Details
Case Title: Mela Ram & Ors. vs State of J&K & Anr.; Arti Devi vs State of J&K & Anr.
Case Number: CRM(M) No. 261/2019 c/w CRM(M) No. 263/2019
Judge: Justice Shahzad Azeem
Decision Date: 16 April 2026










