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भरण-पोषण याचिका में पति की आय को बढ़ा-चढ़ाकर बताना झूठी गवाही का आधार नहीं है: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी के कथित गलत हलफनामे पर कार्रवाई से इनकार करते हुए पति की अपील खारिज की, कहा न्यायहित में कार्रवाई जरूरी नहीं। -

Shivam Y.
भरण-पोषण याचिका में पति की आय को बढ़ा-चढ़ाकर बताना झूठी गवाही का आधार नहीं है: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति द्वारा दायर आपराधिक अपील को खारिज कर दिया। मामला पत्नी द्वारा भरण-पोषण (maintenance) केस में पति की आय को लेकर दिए गए कथित गलत हलफनामे से जुड़ा था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह अपील अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, प्रयागराज के 28 अक्टूबर 2025 के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। पति का आरोप था कि पत्नी ने धारा 125 CrPC के तहत चल रहे मामले में उसकी आय ₹80,000 और ₹1,25,000 प्रति माह बताकर झूठा हलफनामा दिया, जबकि वास्तविक आय ₹11,000 है।

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पति ने इस आधार पर धारा 340 CrPC (अब 379 BNSS) के तहत आपराधिक कार्रवाई की मांग की थी।

न्यायमूर्ति राज बीर सिंह ने कहा कि धारा 340 CrPC का उद्देश्य हर गलत बयान पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि केवल उन मामलों में हस्तक्षेप करना है जहां न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक हो।

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कोर्ट ने स्पष्ट किया:

“ऐसे मामलों में, जब तक यह स्पष्ट न हो कि झूठा बयान जानबूझकर और गंभीर रूप से दिया गया है, तब तक अभियोजन शुरू करना उचित नहीं है।”

साथ ही, कोर्ट ने यह भी माना कि भरण-पोषण मामलों में अक्सर आय को लेकर अतिशयोक्ति (exaggeration) होती है, जिसे केवल इसी आधार पर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने पाया कि परिवार न्यायालय द्वारा आवेदन खारिज करने में कोई कानूनी त्रुटि या असंगति नहीं थी।

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अदालत ने कहा कि पति की आय का वास्तविक निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर परिवार न्यायालय में लंबित कार्यवाही में ही किया जाएगा।

अंततः, कोर्ट ने कहा:

“इस मामले में न्याय के हित में कोई आपराधिक कार्यवाही आवश्यक नहीं है।”

इसी आधार पर अपील को खारिज कर दिया गया।

Case Details

Case Title: SKD v State of U.P. and Another

Case Number: Criminal Appeal No. 72 of 2026

Judge: Justice Raj Beer Singh

Decision Date: March 13, 2026

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