राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने एक सड़क हादसे से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि दुर्घटना केवल ट्रक चालक की वजह से नहीं हुई थी, बल्कि कार चालक की तेज और लापरवाह ड्राइविंग भी इसके लिए जिम्मेदार थी। अदालत ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए मृतक के परिवार को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 7 जनवरी 2011 की सुबह करीब 3 बजे हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। संतोष कुमार शर्मा, जगदीश प्रसाद और अन्य लोग स्कॉर्पियो कार से ललसोट से दिल्ली जा रहे थे। अलवर-भिवाड़ी हाईवे पर जाजोर के पास उनकी कार एक खड़े ट्रक से टकरा गई। हादसे में संतोष कुमार शर्मा और जगदीश प्रसाद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य यात्रियों को गंभीर चोटें आईं।
कोर्ट ने FIR और साइट प्लान के आधार पर माना कि ट्रक सड़क किनारे खड़ा था, लेकिन उस पर कोई इंडिकेटर या चेतावनी संकेत नहीं था। वहीं कार की रफ्तार भी काफी तेज बताई गई। पुलिस ने जांच के बाद कार चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की, जबकि ट्रक चालक के खिलाफ सड़क पर अवरोध पैदा करने का मामला दर्ज किया गया।
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दुर्घटना पूरी तरह ट्रक चालक की लापरवाही से हुई क्योंकि ट्रक बिना किसी चेतावनी संकेत के सड़क पर खड़ा था। कंपनी ने कहा कि यदि ट्रक पर इंडिकेटर या रिफ्लेक्टर लगे होते तो हादसा टल सकता था।
न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की एकल पीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद एफआईआर, साइट प्लान और गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि हर चरण पर यह बात सामने आई कि कार तेज गति से चलाई जा रही थी और चालक ने समय रहते ब्रेक नहीं लगाए।
अदालत ने कहा कि यदि चालक समय पर ब्रेक लगाता तो दुर्घटना टाली जा सकती थी।
कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रक चालक ने भी सावधानी नहीं बरती क्योंकि ट्रक बिना किसी चेतावनी संकेत के सड़क किनारे खड़ा था। अदालत के अनुसार,
“यदि ट्रक चालक ने इंडिकेटर या चेतावनी संकेत लगाए होते, तो दुर्घटना संभवतः नहीं होती।”
मृतक संतोष कुमार शर्मा के परिवार ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय कम आंकी थी। अदालत ने आयकर रिटर्न को विश्वसनीय दस्तावेज मानते हुए मृतक की वार्षिक आय ₹1,74,395 स्वीकार की। साथ ही मृतक की उम्र 41 वर्ष मानी गई।
कोर्ट ने भविष्य की आय, कंसोर्टियम और अन्य मदों को जोड़ते हुए कुल मुआवजा ₹24,78,935 तय किया। पहले ट्रिब्यूनल ने ₹8,85,500 दिए थे। हाईकोर्ट ने इसमें ₹15,93,435 की अतिरिक्त राशि जोड़ दी।
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की सभी अपीलें खारिज करते हुए माना कि दुर्घटना दोनों वाहनों के चालकों की लापरवाही का परिणाम थी। साथ ही, बीमा कंपनियों को दो महीने के भीतर बढ़ी हुई मुआवजा राशि जमा कराने का निर्देश दिया।
Case Details:
Case Title: United India Insurance Company Ltd. vs Smt. Mamta Sharma & Ors. connected matters
Case Number: S.B. Civil Miscellaneous Appeal No. 292/2016 and connected appeals
Judge: Justice Sandeep Taneja
Decision Date: 06 May 2026











