सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के हजारों पारा शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की मांग पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि उन्हें सीधे तौर पर सहायक अध्यापक या सहायक आचार्य के पदों पर नियमित नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि पारा शिक्षकों के लिए तय 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर हर शैक्षणिक वर्ष में नियमित भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए।
न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार एक ओर नियमितीकरण का विरोध नहीं कर सकती और दूसरी ओर अपने ही बनाए नियमों को लागू करने में देरी भी नहीं कर सकती।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता झारखंड के विभिन्न जिलों में सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत कार्यरत पारा शिक्षक थे। उन्होंने दावा किया कि वे पिछले कई वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, शिक्षक पात्रता परीक्षा(TET) पास कर चुके हैं और नियमित शिक्षकों जैसा ही काम कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए, उन्हें सहायक अध्यापक के खाली पदों पर नियुक्त किया जाए और समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में शिक्षकों की भारी कमी है, फिर भी अनुभवी पारा शिक्षकों को नियमित करने के बजाय नई नियुक्तियां की जा रही हैं।
राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि पारा शिक्षकों की नियुक्ति शुरू से ही संविदा आधार पर हुई थी और यह नियुक्तियां SSA योजना से जुड़ी थीं। सरकार के अनुसार, यह कोई नियमित सरकारी कैडर पोस्ट नहीं थी।
सरकार ने बताया कि 2012 और 2022 के नियमों में पहले से ही पारा शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में सीधे नियमितीकरण की मांग संवैधानिक व्यवस्था और भर्ती नियमों के खिलाफ होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालतें अनुच्छेद 226 या अनुच्छेद 142 के तहत ऐसा आदेश नहीं दे सकतीं जिससे भर्ती के वैधानिक नियमों को दरकिनार कर दिया जाए।
पीठ ने कहा,
“पारा शिक्षकों को सीधे नियमित करना भर्ती का एक नया तरीका तैयार करने जैसा होगा, जिसकी अनुमति कानून नहीं देता।”
अदालत ने यह भी माना कि पारा शिक्षक लंबे समय से काम कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि नौकरी की सुरक्षा शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता से सीधे जुड़ी हुई है।
फैसले में कहा गया,
“किसी पारा शिक्षक से यह अपेक्षा करना कि वह बच्चों का भविष्य सुरक्षित करे, जबकि उसकी अपनी नौकरी सुरक्षित न हो, व्यावहारिक नहीं है।”
हालांकि अदालत ने नियमितीकरण की मांग खारिज कर दी, लेकिन राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि झारखंड सरकार को सहायक अध्यापक और सहायक आचार्य के उन 50 प्रतिशत पदों के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए जो पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हर शैक्षणिक वर्ष में ऐसी भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि पारा शिक्षकों को अवसर मिलता रहे।
अदालत ने माना कि पारा शिक्षकों को नियमितीकरण का अधिकार नहीं है, लेकिन उन्हें भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने और विचार किए जाने का अधिकार जरूर है।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पारा शिक्षकों की सीधी नियमित नियुक्ति की मांग खारिज कर दी। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित पदों पर समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करे।
Case Details:
Case Title: Sunil Kumar Yadav and Others v. State of Jharkhand and Others
Case Number: Special Leave Petition (Civil) No. 4881 of 2023 and connected matters
Judge: Justice S.V.N. Bhatti and Justice Pankaj Mithal
Decision Date: May 7, 2026











