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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुजफ्फरनगर मामले में इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित आपत्तिजनक इंस्टाग्राम पोस्ट मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि पोस्ट में किसी समुदाय का नाम नहीं था। - नदीम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, प्रधान सचिव (गृह)

Shivam Y.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मुजफ्फरनगर मामले में इंस्टाग्राम पोस्ट को लेकर आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में जेल में बंद एक युवक को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह नहीं दिखता कि पोस्ट में किसी विशेष जाति या समुदाय का नाम लिया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना थाने में दर्ज केस क्राइम नंबर 411/2025 से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(2), 192 और 152 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऐसी टिप्पणी पोस्ट की थी जिसे आपत्तिजनक माना गया।

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। वकील ने कहा कि आरोपी 7 अक्टूबर 2025 से जेल में है और अब मामले में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी द्वारा की गई टिप्पणी संवेदनशील और भड़काऊ थी। राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि इसी तरह के नारों और टिप्पणियों के कारण पहले बरेली जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी थी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।

हालांकि, सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष यह स्वीकार करने से इंकार नहीं कर सका कि बरेली वाले मामले का आरोपी अलग व्यक्ति था और उसका इस मामले के आरोपी से सीधा संबंध नहीं था।

अदालत ने मामले की सामग्री पर गौर करते हुए कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह लंबे समय से जेल में बंद है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कथित इंस्टाग्राम पोस्ट में किसी विशेष जाति या समुदाय का उल्लेख नहीं किया गया था।

अदालत ने कहा,

“जांच के दौरान एकत्र सामग्री, आरोपी की भूमिका और इस तथ्य को देखते हुए कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उसे जमानत पर रिहा किया जाना उचित है।”

हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए आरोपी नदीम को निजी मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने शर्त रखी कि आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा, किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा और ट्रायल में सहयोग करेगा।

Case Details

Case Title: Nadeem vs State of U.P. Through Principal Secretary (Home), Lucknow

Case Number: Criminal Misc. Bail Application No. 40267 of 2025

Judge: Justice Rajiv Lochan Shukla

Decision Date: May 4, 2026

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