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परिवार की धमकियों से राहत: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- अपनी मर्जी से शादी करने वाले बालिग जोड़े को मिलेगी पुलिस सुरक्षा

दिल्ली हाई कोर्ट ने बालिग दंपति को सुरक्षा देते हुए कहा कि अपनी पसंद से विवाह करना मौलिक अधिकार है और पुलिस को संरक्षण देना होगा। - कीर्ति एवं अन्य बनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र राज्य एवं अन्य।

Shivam Y.
परिवार की धमकियों से राहत: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- अपनी मर्जी से शादी करने वाले बालिग जोड़े को मिलेगी पुलिस सुरक्षा

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद से शादी करने का पूरा अधिकार है और ऐसे दंपतियों को सुरक्षा देना राज्य का दायित्व है। कोर्ट ने एक नवविवाहित जोड़े को संभावित खतरे के मद्देनज़र पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कीर्ति और अन्य बनाम दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी राज्य और अन्य से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने अपनी जान को खतरा बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि उन्होंने 18 मार्च 2026 को अपनी इच्छा से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। हालांकि, लड़की के पिता (प्रतिवादी संख्या 4) इस विवाह से नाराज़ हैं और लगातार धमकी दे रहे हैं।

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डर के कारण दंपति फिलहाल दिल्ली से बाहर रह रहे हैं, जबकि वे भविष्य में दिल्ली में बसना चाहते हैं।

माननीय न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हैं और अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र हैं।

कोर्ट ने कहा,

“एक बार जब दो बालिग अपनी इच्छा से विवाह कर लेते हैं, तो उन्हें गरिमा और स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार है।”

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अदालत ने यह भी दोहराया कि यह अधिकार संविधान के तहत संरक्षित है और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप, चाहे वह परिवार या समाज से हो, स्वीकार्य नहीं है।

साथ ही, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों - शफीन जहां बनाम अशोकन के.एम. और लता सिंह उत्तर प्रदेश राज्य - का हवाला देते हुए कहा कि वयस्कों की पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता आवश्यकता पड़ने पर संबंधित थाना (संगम विहार) के SHO या बीट कांस्टेबल से संपर्क कर सकते हैं।

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पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं को आवश्यक सुरक्षा और सहायता प्रदान करें।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दंपति किसी अन्य क्षेत्र में स्थानांतरित होते हैं, तो वे संबंधित थाना को तीन दिनों के भीतर सूचित करेंगे, और वहां की पुलिस भी उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगी।

इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details:

Case Title: Kirti & Anr. vs State of NCT of Delhi & Ors.

Case Number: W.P.(CRL) 1203/2026

Judge: Justice Saurabh Banerjee

Decision Date: April 15, 2026

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