मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज के 51 प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों को जनगणना 2026-27 की ड्यूटी में गणनाकर्ता (Enumerator) और पर्यवेक्षक (Supervisor) बनाए जाने के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि क्लास-I अधिकारियों को इस तरह की जिम्मेदारी देना जनगणना नियम, 1990 की भावना और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के विपरीत है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे सभी उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज में क्लास-I पदों पर कार्यरत हैं और उन्हें मोबाइल संदेशों के जरिए जनगणना कार्य के लिए नियुक्त किया गया। उन्हें 24 अप्रैल से 26 अप्रैल 2026 तक प्रशिक्षण में शामिल होने और बाद में गणनाकर्ता तथा पर्यवेक्षक के रूप में काम करने के निर्देश दिए गए थे।
याचिका में कहा गया कि जनगणना नियम, 1990 के अनुसार गणनाकर्ता आमतौर पर शिक्षक, क्लर्क या समान श्रेणी के अन्य कर्मचारियों में से नियुक्त किए जाते हैं। जबकि याचिकाकर्ता वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी हैं और उन्हें जूनियर अधिकारियों के अधीन काम करने को कहा गया था।
अदालत ने जनगणना नियम, 1990 के नियम 3 और उससे जुड़ी तालिका का हवाला देते हुए कहा कि Enumerator की नियुक्ति सामान्यतः क्लास-III स्तर के कर्मचारियों से की जाती है। कोर्ट ने माना कि क्लास-I अधिकारियों को गणनाकर्ता या पर्यवेक्षक बनाना नियमों के अनुरूप नहीं है।
कोर्ट ने कहा,
“क्लास-I अधिकारियों को ऐसे अधिकारियों के अधीन कार्य करने के लिए बाध्य करना, जो उनसे कनिष्ठ स्तर के हैं, प्रशासनिक असंगति पैदा करता है।”
अदालत ने यह भी नोट किया कि कॉलेज में उसी समय बीई और बीटेक की परीक्षाएं चल रही थीं। इसके अलावा NEET-2026 परीक्षा की व्यवस्था भी कॉलेज को करनी थी। ऐसे में 51 शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में भेजने से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होतीं और संस्थान का संचालन मुश्किल हो जाता।
रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि शुरुआत में कॉलेज प्रशासन ने गलती से क्लास-I अधिकारियों के नाम जनगणना कार्य के लिए भेज दिए थे। बाद में 13 अप्रैल 2026 को प्रिंसिपल ने संशोधित पत्र जारी कर इन अधिकारियों की ड्यूटी रद्द करने का अनुरोध किया था।
जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड, जनगणना नियम और प्रिंसिपल द्वारा भेजे गए संशोधित पत्र को देखते हुए याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति “कानूनी और प्रशासनिक रूप से टिकाऊ नहीं” है।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज के 51 क्लास-I अधिकारियों की जनगणना 2026-27 ड्यूटी तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए पारित किया गया है और इसे अन्य मामलों में मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा।
Case Details
Case Title: Dr. Smt. Savita Maru and Others v. Directorate of Census Operations Madhya Pradesh and Others
Case Number: Writ Petition No. 15363 of 2026
Judge: Justice Jai Kumar Pillai
Decision Date: April 29, 2026











